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महालक्ष्मी-नारायण मंदिर में 28 लाख रुपए से सजावट:नोटों से बनाए कलश, हार और आभूषण; धनतेरस पर भक्तों ने गहने चढ़ाए
इंदौर के जवाहर मार्ग स्थित महालक्ष्मी-नारायण मंदिर में दीपावली के अवसर पर 28 लाख की लागत से आकर्षक सजावट की गई। शहर के कम चर्चित मंदिरों में शामिल इस मंदिर में हर साल दीपावली पर विशेष शृंगार किया जाता है। इस बार अब तक की सबसे महंगी सजावट की गई है। इसमें नोटों से कलश, हार, गाड़ी और अन्य आभूषण तैयार किए गए हैं। मंदिर में धनतेरस से दीपावली तक उत्सव का माहौल बना हुआ है। अष्टलक्ष्मी में से वैभव लक्ष्मी का किया विशेष शृंगार धनतेरस और दीपावली के अवसर पर अष्टलक्ष्मी में से वैभव लक्ष्मी का 28 लाख पांच सौ रुपए के नोटों से शृंगार किया गया। मराठिया व्यापारी संघ की ओर से दान-दक्षिणा के रूप में यह राशि उपलब्ध कराई गई। नोटों से तैयार किए गए सभी आभूषण और सजावटी सामग्री दीपावली का पर्व संपन्न होने के बाद व्यापारियों को लौटा दी जाती है। पुजारी के दादाजी को सपने में हुई थी भगवान की उपस्थिति का आभास मंदिर के पुजारी ध्रुव शर्मा ने बताया कि उनके दादाजी को सपने में भगवान ने अपनी उपस्थिति का आभास कराया था। भगवान ने उन्हें बताया कि वे यहां विराजमान हैं और उन्हें इस स्थान से बाहर निकालने के लिए कहा। इसके बाद उनके दादाजी ने मंदिर का निर्माण करवाया। तब से धीरे-धीरे भक्तों की आस्था इस मंदिर से जुड़ती गई और यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना होने लगी। धनतेरस पर खरीदे गहने पहले माता को किए अर्पित मंदिर में भक्तों की आस्था का एक अलग रूप भी देखने को मिला। कई भक्तों ने धनतेरस पर खरीदे नए आभूषण पहले माता को अर्पित किए। इन गहनों को अपनी संपत्ति के बजाय माता की संपत्ति मानकर उन्हें समर्पित किया। पूजा के बाद भक्त अपने आभूषण वापस अपने साथ ले गए। इस परंपरा के पीछे भाव यही है कि व्यक्ति अपनी प्रिय और मूल्यवान वस्तु भी पहले भगवान को अर्पित कर स्वयं को उनकी कृपा और संरक्षण के प्रति समर्पित करता है।