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कभी योग सिखाती थीं, आज अमेरिका की विधायक! गाजियाबाद की सबा हैदर ने 70.9% वोट से रच दिया इतिहास

UP News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की सबा हैदर ने अमेरिका में अपनी कामयाबी से नया इतिहास रच दिया है. कभी अमेरिका में योग प्रशिक्षक के रूप में लोगों को योग सिखाने वाली सबा अब अमेरिकी राज्य इलिनॉय की राजनीति में अपनी पहचान बना चुकी हैं. उन्होंने 3 नवंबर को हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में इलिनॉय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के 84वें डिस्ट्रिक्ट से शानदार जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ वह इलिनॉय जनरल असेंबली के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं. उनकी इस उपलब्धि से गाजियाबाद में रह रहे परिवार और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल है. आइए जानते हैं कि योग सिखाने से शुरू हुआ उनका सफर अमेरिका की राजनीति के इस बड़े मुकाम तक कैसे पहुंचा.
84वें डिस्ट्रिक्ट से जीता चुनाव, 70.9 फीसदी वोट मिले
सबा हैदर ने अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार के रूप में इलिनॉय के 84वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा था. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को बड़े अंतर से हराया. रिपोर्ट किए गए चुनावी नतीजों के मुताबिक, सबा को 20,756 वोट यानी 70.9 फीसदी मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ब्रायन स्कोपा को 8,520 वोट यानी 29.1 फीसदी मत प्राप्त हुए. इस जीत के साथ सबा ने इलिनॉय की राजनीति में इतिहास रच दिया. वह राज्य की जनरल असेंबली के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं. उनकी यह उपलब्धि भारतीय मूल के लोगों के लिए भी खास मानी जा रही है.
गाजियाबाद में हुई पढ़ाई, AMU से हासिल की मास्टर डिग्री
सबा हैदर का गाजियाबाद से गहरा जुड़ाव रहा है. उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद का रहने वाला है. उनके पिता काम के सिलसिले में गाजियाबाद आकर बस गए थे. सबा ने शुरुआती पढ़ाई गाजियाबाद के होली चाइल्ड स्कूल से की. इसके बाद उन्होंने राम चमेली चड्ढा विश्वास गर्ल्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में दाखिला लिया. यहां से उन्होंने वाइल्डलाइफ साइंस में एमएससी की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान उन्होंने गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया. शिक्षा के क्षेत्र में उनकी यह उपलब्धि आगे के सफर में काफी अहम रही.
2007 में अमेरिका पहुंचीं, योग सिखाकर शुरू किया नया सफर
सबा हैदर की जिंदगी में वर्ष 2007 एक बड़ा बदलाव लेकर आया. वर्ष 2006 में कंप्यूटर इंजीनियर अली काजमी से शादी के बाद वह अमेरिका चली गईं. वहां उन्होंने योग प्रशिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने अमेरिकी छात्रों और कामकाजी लोगों को योग सिखाना शुरू किया. धीरे-धीरे अलग-अलग समुदायों के लोग उनकी योग कक्षाओं से जुड़ने लगे. इस दौरान उन्हें स्थानीय लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने और उनकी समस्याओं को करीब से समझने का मौका मिला. योग प्रशिक्षण के साथ-साथ उनकी सामाजिक गतिविधियों में भी रुचि बढ़ी. वह सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगीं. लोगों के बीच काम करने के इसी अनुभव ने उन्हें सार्वजनिक जीवन और फिर राजनीति की ओर आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया.
2022 में मिली हार, 2024 में काउंटी बोर्ड का चुनाव जीता
सबा हैदर का राजनीतिक सफर भी आसान नहीं रहा. उन्होंने वर्ष 2022 में पहली बार ड्यूपेज काउंटी बोर्ड का चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, इस हार के बाद भी उन्होंने लोगों के बीच काम करना जारी रखा. वर्ष 2024 में उन्होंने एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया. इस बार उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार पैटी गुस्टिन को हराकर ड्यूपेज काउंटी बोर्ड में अपनी जगह बनाई. यहां उन्होंने पर्यावरण और रणनीतिक योजना से जुड़ी समितियों में नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यों में भी उनकी भागीदारी रही. काउंटी बोर्ड में काम करने के दौरान उन्हें स्थानीय प्रशासन और जनता से जुड़े मुद्दों को समझने का अनुभव मिला. अब इलिनॉय हाउस का चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है.
सबा की जीत पर गाजियाबाद में जश्न, परिवार ने जताया गर्व
अमेरिका में सबा हैदर की जीत की खबर मिलते ही गाजियाबाद में उनके परिवार और रिश्तेदारों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई. परिवार के लिए यह गर्व का पल है. उनकी उपलब्धि की चर्चा इलाके में भी हो रही है. चुनाव जीतने के बाद सबा ने अपने मतदाताओं, परिवार, दोस्तों, प्रचार टीम और स्वयंसेवकों का आभार जताया. उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने पिछले 15 महीनों तक 84वें डिस्ट्रिक्ट के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से बातचीत की. उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझा और बेहतर समुदाय बनाने के लिए काम किया. सबा हैदर की कहानी इस बात की मिसाल है कि शिक्षा, मेहनत और लगातार प्रयास से इंसान दुनिया के किसी भी कोने में अपनी पहचान बना सकता है. गाजियाबाद से अमेरिका तक का उनका सफर अब एक ऐतिहासिक राजनीतिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है.
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