Friday, 6 November 2026
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Delhi Pollution: दिल्ली के 7 इलाकों में AQI 400 के पार, IIT दिल्ली-रोहिणी में 474, आखिर क्यों जहरीली हुई हवा?

INT News6 November 2026 at 05:05 pm

Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में घोर प्रदूषण से लोगों का हाल बेहाल है. कई इलाकों में हवा इतनी खराब हो गई है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है. शुक्रवार (6 नवंबर) को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474 दर्ज किया गया. पंजाबी बाग में यह 465, जबकि आरके पुरम में 443 रहा.

पूरे शहर का औसत AQI 389 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है. दिवाली के आसपास बढ़ते प्रदूषण और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई गई है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल प्रतिबंध लगाने से प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा.

दिल्ली के किन इलाकों में कितनी जहरीली हुई हवा?

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में चिंताजनक बनी हुई है. CPCB के आंकड़ों के अनुसार, IIT दिल्ली और रोहिणी सबसे अधिक प्रदूषित स्थानों में शामिल रहे. इन दोनों जगहों पर AQI 474 दर्ज किया गया. पंजाबी बाग और आरके पुरम में भी हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई.

दिल्ली के किस इलाके में कितना प्रदूषण?

दिल्ली का इलाका AQI हवा की गुणवत्ता IIT दिल्ली 474 गंभीर रोहिणी 474 गंभीर पंजाबी बाग 465 गंभीर आरके पुरम 443 गंभीर ITO 422 गंभीर फिरोज शाह रोड 420 गंभीर इंडिया गेट 403 गंभीर आया नगर 393 बहुत खराब चांदनी चौक 391 बहुत खराब IGI एयरपोर्ट T3 385 बहुत खराब आनंद विहार-अक्षरधाम क्षेत्र 359 बहुत खराब

दिल्ली में क्यों बिगड़ रहे हैं हालात?

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं. वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम की परिस्थितियां हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है. दिवाली के आसपास पटाखों का धुआं भी प्रदूषण बढ़ाने वाला एक कारण बन सकता है. सर्दियों की शुरुआत में हवा की गति कम होने और वातावरण की निचली परतों में प्रदूषक कण जमा होने से स्थिति और खराब हो सकती है.

AQI 400 के पार पहुंचने का क्या मतलब है?

AQI 400 के पार होने का मतलब

हवा में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है. ऐसी स्थिति स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकती है. अस्थमा, सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा अधिक हो सकता है.

'सिर्फ प्रतिबंध लगाने से नहीं होगा समाधान', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बार-बार प्रतिबंध लगाने और नए आदेश जारी करने से ही समस्या समाप्त नहीं होगी. अदालत ने लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक करने और व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत बताई. पीठ का कहना था कि नियमों की संख्या बढ़ाने से उनके उल्लंघन की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं. इसलिए पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नागरिकों की भागीदारी जरूरी है.

CJI ने पूछा- हम पुराने रीति-रिवाजों पर वापस क्यों नहीं लौटते?

दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान बढ़ते प्रदूषण की चर्चा करते हुए CJI सूर्यकांत ने पारंपरिक तरीकों से उत्सव मनाने पर विचार करने की बात कही. उन्होंने सवाल किया कि लोग अपने पुराने रीति-रिवाजों की ओर वापस क्यों नहीं लौट सकते? अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि त्योहारों का आनंद लेने के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है. वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने त्योहारों के बढ़ते व्यवसायीकरण का मुद्दा उठाया.

गरीब प्रदूषण फैलाने वाले नहीं, बल्कि पीड़ित हैं- CJI

प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की स्थिति पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि गरीब लोगों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है, क्योंकि वे स्वयं इसके दुष्प्रभावों का सामना करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका मौसमी कारोबार पर निर्भर करती है. ऐसे में प्रदूषण रोकने के उपायों पर विचार करते समय रोजगार और आर्थिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

इंडिया गेट पर पानी का छिड़काव, प्रदूषण रोकने की कोशिश

प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के तहत उपाय किए जा रहे हैं. इंडिया गेट क्षेत्र में नगर निगम के अधिकारियों ने पानी का छिड़काव करने के लिए ट्रक पर लगे स्प्रिंकलर का इस्तेमाल किया. इसका उद्देश्य सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना है. हालांकि, पानी का छिड़काव प्रदूषण कम करने के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है और इससे सभी प्रकार के वायु प्रदूषकों को नियंत्रित नहीं किया जा सकता.

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