Friday, 23 October 2026
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जिला अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम 2 साल से बंद:50 लाख खर्च के बाद भी अलार्म और पानी की व्यवस्था ठप, सिविल सर्जन बोले- बजट नहीं है

INT News23 October 2026 at 06:44 pm

बैतूल जिला अस्पताल में भर्ती सैकड़ों मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम करीब दो साल से बंद है। आग लगने पर धुआं पहचानकर अलार्म बजाने वाले सेंसर और अपने आप पानी पहुंचाने की व्यवस्था काम नहीं कर रही है। ऐसे में आग लगने पर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है। 50 लाख की लागत से लगा था सिस्टम, काम अधूरा जानकारी के मुताबिक, अस्पताल की बिल्डिंग के निर्माण के साथ करीब 50 लाख रुपए की लागत से फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया गया था। बताया जा रहा है कि गुजरात की एक कंपनी ने कम दर पर काम लिया था। बाद में काम भोपाल की एजेंसी को सौंपा गया। पाइप लगाने के बाद काम अधूरा रह गया। धुआं उठने पर अलार्म बजाने वाले सेंसर लगाने की व्यवस्था भी पूरी नहीं हो सकी। अस्पताल के वार्डों में अग्निशमन उपकरण लगे हैं। समय-समय पर इन्हें रिफिल भी कराया जाता है, लेकिन पूरा ऑटोमैटिक सिस्टम चालू नहीं है। ऐसे में आग लगने पर समय रहते सूचना मिलने और अपने आप पानी पहुंचने की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। सिविल सर्जन बोले- कई पत्र लिखे, बजट नहीं मिला सिविल सर्जन डॉ. जगदीश घोरे ने बताया कि फायर सेफ्टी सिस्टम चालू कराने के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर बजट उपलब्ध नहीं है। इसलिए अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर सिस्टम को दुरुस्त नहीं करा पा रहा है। मामला राज्य स्तर पर लंबित है। उन्होंने बताया कि शासन ने पहले की एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और अब नई एजेंसी को काम सौंपा गया है। हालांकि, सिस्टम को पूरी तरह चालू करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। 22 नवंबर 2025 को आग लगने से मची थी अफरा-तफरी जिला अस्पताल में आग लगने की घटना पहले भी हो चुकी है। 22 नवंबर 2025 को आग लगने के बाद मरीजों में अफरा-तफरी मच गई थी। मरीज अपने बिस्तर और वार्ड छोड़कर बाहर निकलने लगे थे। इसके बाद भी फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सका। उस घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने जांच कमेटी बनाई थी। इसमें एसडीएम अभिजीत सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। सिस्टम चालू कराने के लिए पत्राचार भी किया गया, लेकिन व्यवस्था अब तक अधूरी है। कमिश्नर ने किया दौरा, सवालों पर नहीं दिया जवाब स्वास्थ्य कमिश्नर ने आज जिला अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान वे मीडिया से अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सुझाव मांगते रहे, लेकिन पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया। फायर सेफ्टी सिस्टम बंद होने और मरीजों की सुरक्षा को लेकर उनका पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं। ऐसे में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर अलार्म, धुआं पहचानने वाले सेंसर और ऑटोमैटिक पानी की व्यवस्था का चालू होना जरूरी है। नियमित फायर ऑडिट भी जरूरी है। सवाल यह है कि जांच, रिपोर्ट और कई बार पत्राचार के बाद भी व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं हो पाई और मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।