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Delhi Pollution: दिवाली से पहले प्रदूषण ने बढ़ाई टेंशन, AQI 474 तक पहुंचा, GRAP-3 लागू

Delhi NCR Pollution: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का तीसरा चरण (GRAP-3) लागू कर दिया है. आयोग की उपसमिति ने हालात और मौसम संबंधी परिस्थितियों का आकलन करने के बाद एहतियातन यह कदम उठाया है. इसके तहत वाहनों, निर्माण गतिविधियों और प्रदूषण बढ़ाने वाले अन्य कार्यों पर सख्ती की जाएगी. साथ ही स्कूलों और कार्यालयों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 382 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है. हालांकि राजधानी के कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच चुका है. प्रशासन ने मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए एहतियातन प्रतिबंध बढ़ाए हैं, ताकि आने वाले दिनों में हालात और खराब न हों.
IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474, कई इलाकों में सांस लेना मुश्किल
दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में वायु गुणवत्ता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. CPCB के आंकड़ों के अनुसार...
IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474 रिकॉर्ड किया गया.
पंजाबी बाग में यह 465
आरके पुरम में 443
ITO में 422 रहा.
फिरोज शाह रोड पर 420
इंडिया गेट पर 403 AQI दर्ज किया गया
AQI 401 से नीचे होने पर भी क्यों लगाया गया GRAP-3?
आमतौर पर GRAP का तीसरा चरण तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली का औसत AQI 401 से 450 के बीच पहुंच जाता है. लेकिन इस बार शहर का औसत सूचकांक 382 होने के बावजूद एहतियाती कार्रवाई की गई है. CAQM ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के मौसम एवं प्रदूषण संबंधी पूर्वानुमानों को ध्यान में रखा है. इसका उद्देश्य प्रदूषण के गंभीर स्तर तक पहुंचने का इंतजार करने के बजाय पहले से नियंत्रण के उपाय लागू करना है.
दिल्ली-NCR में किन गाड़ियों के चलने पर लगेगी रोक?
GRAP-3 के तहत दिल्ली और निर्धारित NCR जिलों में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों के संचालन पर सख्त प्रतिबंध लागू होंगे. पुराने हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों पर भी नियंत्रण बढ़ाया जाएगा. इसके अलावा दिल्ली के बाहर पंजीकृत कुछ डीजल व्यावसायिक वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर पाबंदियां रहेंगी. संबंधित एजेंसियों को यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए निर्धारित छूट लागू रहेगी.
निर्माण कार्य, खनन और स्टोन क्रशर पर सख्ती
प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए गैरजरूरी और अधिक धूल पैदा करने वाली निर्माण गतिविधियों को बंद किया जाएगा. इनमें बड़े पैमाने पर खुदाई, मिट्टी भरने, इमारतों को तोड़ने और सड़क निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं. स्टोन क्रशर और खनन से संबंधित गतिविधियों पर भी प्रतिबंध या संचालन संबंधी सख्त नियंत्रण लागू होंगे. हालांकि, आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के तहत काम जारी रखने की अनुमति मिल सकती है. ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए धूल रोकने के उपाय अपनाना अनिवार्य होगा.
पांचवीं तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था
बढ़ते प्रदूषण का असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है. GRAP-3 के तहत शिक्षा अधिकारियों को प्राथमिक कक्षाओं के लिए हाइब्रिड व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. इस प्रणाली में बच्चों को स्कूल जाकर पढ़ने के साथ ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाता है. इसका उद्देश्य छोटे बच्चों को प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से बचाना है.
मेट्रो और बस सेवाएं बढ़ाने पर जोर
निजी वाहनों की संख्या कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की तैयारी है. संबंधित एजेंसियां अतिरिक्त मेट्रो फेरे और बस सेवाएं बढ़ाने जैसे उपाय कर रही हैं. प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग निजी गाड़ियों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें. इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाने और उत्सर्जन नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
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