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टाटा स्टील का जबरदस्त प्रदर्शन, दूसरी तिमाही में भारत में मुनाफा 20 फीसदी बढ़कर 5,055 करोड़ हुआ

जमशेदपुर: वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और कच्चे माल की बढ़ती लागत के बीच टाटा स्टील ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. जुलाई से सितंबर की अवधि में कंपनी का भारत में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 5,055 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, राजस्व में भी 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी और यह 42,653 करोड़ रुपये रहा. कंपनी के उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों में भी सुधार देखने को मिला है. दूसरी तिमाही में क्रूड स्टील का उत्पादन 7 प्रतिशत और डिलीवरी 16 प्रतिशत बढ़ी है.
भारत में 10,634 करोड़ रुपये का एबिटा
टाटा स्टील के जारी वित्तीय परिणामों के अनुसार, दूसरी तिमाही में भारत में कंपनी का एबिटा 10,634 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. इस दौरान एबिटा मार्जिन 25 प्रतिशत रहा. कंपनी ने जुलाई से सितंबर के बीच 6.18 मिलियन टन क्रूड स्टील का उत्पादन किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 प्रतिशत अधिक है. वहीं, स्टील की डिलीवरी 16 प्रतिशत बढ़कर 5.98 मिलियन टन पहुंच गयी.
कंसोलिडेटेड राजस्व 65,436 करोड़ रुपये
समेकित यानी कंसोलिडेटेड स्तर पर टाटा स्टील का दूसरी तिमाही में कुल राजस्व 65,436 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का समेकित एबिटा 10,665 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. इसमें तिमाही आधार पर 14 प्रतिशत और सालाना आधार पर 17 प्रतिशत का सुधार हुआ है. विदेशी कारोबार में टाटा स्टील नीदरलैंड्स ने 1,395 मिलियन यूरो का राजस्व और 72 मिलियन यूरो का एबिटा हासिल किया. अगस्त में डायरेक्ट शीट प्लांट के दोबारा शुरू होने से परिचालन को मजबूती मिली. वहीं, टाटा स्टील यूके का राजस्व 411 मिलियन पाउंड दर्ज किया गया.
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पहली छमाही में 1.26 लाख करोड़ रुपये का राजस्व
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान टाटा स्टील का समेकित राजस्व 1,26,231 करोड़ रुपये और एबिटा 20,035 करोड़ रुपये रहा. इस अवधि में भारत के कारोबार से 79,641 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ. भारत का एबिटा 20,541 करोड़ रुपये रहा, जो 26 प्रतिशत के मार्जिन को दर्शाता है. कंपनी ने दूसरी तिमाही में पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स पर 3,280 करोड़ रुपये खर्च किये. पहली छमाही में यह खर्च 6,860 करोड़ रुपये रहा. कंपनी की विस्तार योजनाओं में नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआइएनएल) की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 4.8 मिलियन टन प्रति वर्ष करना शामिल है. इसके अलावा 0.7 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली हॉट रोल्ड पिकलिंग और गैल्वनाइजिंग लाइन तथा टिनप्लेट विस्तार परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है.
91,423 करोड़ रुपये है कंपनी का शुद्ध कर्ज
टाटा स्टील का मौजूदा शुद्ध कर्ज 91,423 करोड़ रुपये है. वहीं, कंपनी की कुल लिक्विडिटी 40,076 करोड़ रुपये के मजबूत स्तर पर बनी हुई है. इसमें करीब 10,300 करोड़ रुपये की नकदी और नकदी समकक्ष राशि शामिल है. कंपनी का जोर लागत को नियंत्रित करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और वर्किंग कैपिटल के बेहतर प्रबंधन पर है.
ऑटो और स्पेशल प्रोडक्ट्स की बिक्री ने बनाया रिकॉर्ड
टाटा स्टील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने कहा कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और ग्राहकों के साथ बेहतर जुड़ाव के कारण कंपनी ने बिक्री और कमाई में अच्छी वृद्धि हासिल की है. भारत में मांग और बिक्री का प्रदर्शन कंपनी की मजबूती को दर्शाता है. उन्होंने बताया कि ऑटोमोटिव और स्पेशल प्रोडक्ट्स वर्टिकल में दूसरी तिमाही के दौरान अब तक की सबसे अधिक 1.1 मिलियन टन बिक्री दर्ज की गयी. वहीं, टाटा टिस्कॉन की बिक्री पिछले 12 महीनों में 2.7 मिलियन टन तक पहुंच गयी है. कंपनी के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'आशियाना' और 'डीजीइसीए' ने 2,961 करोड़ रुपये का जीएमवी हासिल किया, जो 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. नरेंद्रन ने बताया कि नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड में 4.8 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता विस्तार की परियोजना निष्पादन चरण में प्रवेश कर चुकी है.
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लागत नियंत्रण और नकदी प्रवाह पर कंपनी का फोकस
कंपनी के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी कौशिक चटर्जी ने कहा कि चुनौतीपूर्ण और उतार-चढ़ाव भरे माहौल में भी टाटा स्टील ने लचीला प्रदर्शन किया है. भारत में अधिक बिक्री और नीदरलैंड्स में परिचालन सामान्य होने से लागत के दबाव को कम करने में मदद मिली. उन्होंने बताया कि भारत के कारोबार ने 17,790 रुपये प्रति टन का एबिटा हासिल किया, जबकि एनआइएनएल ने 318 करोड़ रुपये का एबिटा दर्ज किया. एनआइएनएल का टाटा स्टील में विलय अंतिम एनसीएलटी मंजूरी के अधीन है और इसे इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करने की दिशा में काम चल रहा है. कंपनी का ध्यान लागत अनुकूलन, परिचालन सुधार और वर्किंग कैपिटल प्रबंधन पर केंद्रित है, ताकि नकदी प्रवाह को अधिकतम किया जा सके.