Monday, 26 October 2026
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हिसार में बिना जमीन नाम करवाए बेच दिए प्लॉट:कॉलोनाइजर के खिलाफ बुलाई मीटिंग; सूरजमुखी सोसाइटी के लोग विधायक से करेंगे शिकायत

INT News26 October 2026 at 12:42 pm

दी सूरजमुखी कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड के प्लॉट धारकों में कॉलोनाइजर द्वारा सोसाइटी के नाम जमीन ट्रांसफर न कराने को लेकर भारी रोष है। सोसाइटी की आम सभा (जनरल बॉडी मीटिंग) में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में निर्णय लिया गया कि समस्या के समाधान के लिए स्थानीय विधायक से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। सोसाइटी के प्रधान कैप्टन रामपाल ने बताया कि वर्ष 2010 से 2020 के दौरान कॉलोनाइजर गुलशन कुमार सिंगला द्वारा हिसार कैंट, सातरोड कलां और मायड़ क्षेत्र में करीब 8 से 9 कॉलोनियां काटी गई थीं। इनमें न्यू सैनिक कैंट मार्केट, न्यू विकास नगर, रामदयाल जांगड़ा कॉलोनी, सज्जन कॉलोनी, सुबे सिंह कॉलोनी, मस्तानाथ क्षेत्र और न्यू सैनिक बिहार-1, 11, 12 जैसी कॉलोनियां शामिल हैं। इन कॉलोनियों में 50% से अधिक आबादी बस चुकी है। प्लॉट धारकों में अधिकांश संख्या सेवानिवृत्त व कार्यरत फौजियों तथा जिंदल वर्कर्स की है। कॉलोनाइजर ने प्लॉट धारकों को दी सूरजमुखी सोसाइटी के नाम से अलॉटमेंट कार्ड तो जारी कर दिए, लेकिन अभी तक जमीन सोसाइटी के नाम पंजीकृत नहीं की है। एग्रीमेंट से मुकरने का आरोप सोसाइटी सदस्यों के अनुसार, 5 अक्टूबर 2025 को हुई आम सभा में कॉलोनाइजर गुलशन सिंगला और उनके पुत्र विवेक सिंगला ने वादा किया था कि वे अपने खर्च पर जमीन सोसाइटी के नाम करवा देंगे। इसका वीडियो रिकॉर्ड और मीटिंग रजिस्टर में हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। इसके बाद सितंबर 2026 में वकील के जरिए एग्रीमेंट तैयार करवाया गया, लेकिन कॉलोनाइजर अपने वादे से मुकर गए। बीमारी का बहाना बनाने का दावा सोसाइटी प्रतिनिधियों ने बताया कि 25 अक्टूबर की बैठक में शामिल होने के लिए कॉलोनाइजर को फोन किया गया था। उस समय उन्होंने चंडीगढ़ अस्पताल में भर्ती होने की बात कहकर आने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में कुछ लोग जब उनके दफ्तर पहुंचे, तो वे वहीं मौजूद मिले। सदस्यों का आरोप है कि कॉलोनाइजर की नीयत जमीन ट्रांसफर करने की नहीं है। विधायक से लगाई जाएगी गुहार : प्रधान दी सूरजमुखी कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के प्रधान कैप्टन रामपाल का कहना है कि हम पिछले 4 वर्षों से प्रयासरत हैं, लेकिन जमीन ट्रांसफर नहीं की जा रही है। अधिकतर प्लॉट धारक फौजी और मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। अब हमने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस मामले से स्थानीय विधायक को अवगत कराया जाएगा ताकि प्रशासन के सहयोग से समस्या का समाधान हो सके।