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अनंत सिंह की विधायकी खत्म कराने विधानसभा पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष, स्पीकर को सौंपे 10 पेज के सबूत और वीडियो

Anant Singh: बिहार की सियासत में मोकामा विधायक अनंत सिंह की विधायकी को लेकर हलचल तेज हो गई है. जेडीयू ने उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा सोमवार को विधानसभा पहुंचे. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा वाला पत्र सौंपा. इसके साथ ही करीब 10 पेज के दस्तावेजी सबूत और वीडियो भी दिया गया. अब सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर है.
विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे दस्तावेज और वीडियो
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष से मिलने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने अनंत सिंह की विधायकी रद्द करने की अनुशंसा की. पार्टी की ओर से दिए गए पत्र में सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है.
उमेश कुशवाहा ने पत्र के साथ करीब 10 पेज के दस्तावेजी सबूत भी सौंपे. इसके अलावा वीडियो भी विधानसभा अध्यक्ष को दिया गया है. जेडीयू इन सबूतों के आधार पर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर कार्रवाई चाहती है.
छह साल के लिए JDU से निष्कासित हो चुके हैं अनंत सिंह
अनंत सिंह को जेडीयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है. यह कार्रवाई हालिया विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने के मामले में हुई थी. आरोप है कि अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया और जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया.
इसके बाद पार्टी ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया. अब जेडीयू ने उनकी विधायकी समाप्त करने की अनुशंसा भी कर दी है. इससे अनंत सिंह और पार्टी नेतृत्व के बीच विवाद और गहरा गया है.
प्रेम कुमार ने कहा था- पत्र मिलने पर होगी कार्रवाई
इससे पहले रविवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा था कि जेडीयू की ओर से अनंत सिंह को निष्कासित किए जाने की जानकारी उन्हें समाचार पत्रों से मिली है. हालांकि, उस समय तक विधानसभा कार्यालय को इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला था.
प्रेम कुमार ने कहा था कि पत्र मिलने के बाद उसकी समीक्षा की जाएगी. इसके बाद कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई होगी.
जेडीयू की ओर से अनुशंसा पत्र और दस्तावेज सौंपे जाने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर होगी. पत्र और उपलब्ध कराए गए सबूतों की समीक्षा के बाद ही आगे का कदम तय होगा.
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