Saturday, 7 November 2026
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BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास पर FIR की नौबत क्यों आई? जन्मतिथि विवाद में कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

INT News7 November 2026 at 09:00 pm

Mithun Manhas: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष मिथुन मन्हास को जन्मतिथि से जुड़े विवाद में बड़ी राहत मिली है. जम्मू की एक अदालत ने उनके जन्मतिथि रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी और हेरफेर को लेकर FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने कहा कि मामले में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिसके आधार पर आपराधिक जांच शुरू करने का आदेश दिया जा सके.

अदालत ने FIR दर्ज करने का आदेश देने से किया इनकार

यह आदेश 6 नवंबर 2026 को जम्मू के स्पेशल रेलवे मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सेन ने सुनाया. यह याचिका जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के पूर्व मानद सचिव सुदर्शन मेहता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 175(3) के तहत दाखिल की थी.

मेहता ने मिथुन मन्हास पर जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेजों में धोखाधड़ी, जालसाजी और गलत जानकारी देने के आरोप लगाए थे. उन्होंने मामले में FIR दर्ज कर जांच कराने की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने शिकायत और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद इसे पर्याप्त आधार वाला मामला नहीं माना.

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जन्मतिथि के दस्तावेजों में नहीं मिली गड़बड़ी का ठोस सबूत

सुनवाई के दौरान अदालत ने नौबाद पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) की ओर से पेश जांच रिपोर्ट का भी अध्ययन किया. पुलिस जांच के मुताबिक, मिथुन मन्हास की जन्मतिथि उनके आधिकारिक दस्तावेजों में लगातार 12 सितंबर 1977 दर्ज पाई गई.

इन दस्तावेजों में शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड और नौकरी से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे. अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने मुख्य रूप से दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) की वेबसाइट से कथित तौर पर प्राप्त जानकारी की फोटोकॉपी के आधार पर आरोप लगाए थे. लेकिन केवल इस तरह की कॉपी से यह साबित नहीं होता कि मन्हास ने क्रिकेट संघ के सामने फर्जी दस्तावेज जमा किए या गलत घोषणा की थी.

अदालत ने कहा- सिर्फ रिकॉर्ड में अंतर होना अपराध नहीं

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दो रिकॉर्ड में अंतर दिखाई देने भर से किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता. इसके लिए जालसाजी, दस्तावेजों में हेरफेर या धोखाधड़ी की मंशा से जुड़े स्वतंत्र सबूत जरूरी हैं. अदालत को ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि मिथुन मन्हास ने जानबूझकर गलत जानकारी दी या क्रिकेट में किसी अनुचित लाभ के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया.

इसी आधार पर अदालत ने FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार करते हुए सुदर्शन मेहता की याचिका खारिज कर दी. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता DDCA से उसके रिकॉर्ड का सत्यापन कराने के लिए संपर्क कर सकते हैं. यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो वह कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की मांग कर सकते हैं.

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