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जीवन कुंडू हत्याकांड-थाने CCTV फुटेज गायब:रिकॉर्डिंग में 9 मिनट के कट मिले; हिसार कोर्ट ने कमिश्नर और डीसी को दिए जांच के आदेश
हिसार के बहुचर्चित जीवन कुंडू हत्याकांड में एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपी रमेश की पत्नी प्रोमिला को सुरक्षा के नाम पर थाने लाने, बिना किसी रोजनामचे (DDR) के रखने और बाद में थाने की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज गायब मिलने के मामले में हिसार अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। जुडिशियल मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) अविषेक गर्ग की कोर्ट ने प्रोमिला की अवैध हिरासत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराने के आदेश जारी किए हैं। आरोपी पक्ष के वकील परवीर आर्य का कहना है कि कोर्ट ने हिसार के मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिए हैं कि वह एचटीएम थाने और सीआईए वन पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों के काम न करने के मामले की जांच करें। CCTV कैमरों और रिकॉर्डिंग के बैकअप के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, 4 नवंबर 26 को अपनी रिपोर्ट सौंपें। थानों में फुटेज के हिस्से गायब मिले कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज के गायब होने, रिकॉर्डिंग में 9 मिनट के कट और कागजी रिकॉर्ड (DDR) में भारी घपले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने इस आदेश की प्रति हिसार के मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट को आवश्यक कार्रवाई और जांच सुनिश्चित करने के लिए भेजी है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख या उससे पहले इस पूरे मामले की जांच और की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाए। जानिए क्या था पूरा मामला… 4 अगस्त को घर से उठाया: जीवन कुंडू की मौत के बाद जनाक्रोश और भीड़ के हमले की आशंका को देखते हुए 4 अगस्त 2026 को एचटीएम थाना पुलिस प्रोमिला और उसकी सास को उनके घर से ले गई थी। रिकॉर्ड से गायब रही एंट्री: पुलिस का दावा है कि दोनों महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए लाया गया था, लेकिन पुलिस ने उनके थाने आने या छोड़े जाने की कोई आधिकारिक रोजनामचा (DDR) दर्ज नहीं की। अगले दिन दिखाई गिरफ्तारी: पुलिस ने प्रोमिला की औपचारिक गिरफ्तारी 5 अगस्त को दिखाई और 6 अगस्त को उसे अदालत में पेश किया। अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाए ये सवाल… CCTV का 9 मिनट का कट और गायब हुई गाड़ी: सीआईए (CIA) हिसार के कैमरा नंबर 5 में 4 अगस्त की शाम 6:20:13 से 6:29:13 बजे तक (करीब 9 मिनट) रिकॉर्डिंग अचानक बंद रही। रिकॉर्डिंग कटने से ठीक पहले थाने का सरकारी वाहन दिख रहा था, लेकिन रिकॉर्डिंग शुरू होते ही गाड़ी गायब हो गई। छठे कैमरे पर बदलते पुलिस के बयान: थाने के छठे कैमरे को लेकर पुलिस अधिकारियों ने पहले कहा कि वह खराब था, लेकिन बाद में बयान बदलकर कहा कि कैमरा चालू था पर रिकॉर्डिंग सेव नहीं हो पाई। अदालत ने कहा कि पुलिस के इन परस्पर विरोधी बयानों से संशय पैदा होता है। 'सिस्टम ओवरहीट' की थ्योरी पर खिंचाई: कोर्ट के बार-बार दिए गए आदेशों के बावजूद पूरा सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किया गया। पुलिस ने दलील दी कि सिस्टम के अत्यधिक गर्म होने से डेटा करप्ट हो गया। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अगर 3 अक्टूबर को ही डेटा करप्शन का पता चल गया था, तो तुरंत अदालत को सूचित क्यों नहीं किया गया? कागजी रिकॉर्ड में घोर ढिलाई: महिला को सुरक्षा के तहत थाने लाने की बात पर रोजनामचे में कोई एंट्री (DDR) न होना और केवल जांच जिमनी के भरोसे रहना पुलिस की भारी ढिलाई और गंभीर चूक को दर्शाता है। अदालत का अंतिम फैसला अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह पूरी तरह सिद्ध नहीं होता कि प्रोमिला को अवैध हिरासत में रखा गया था या गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे, इसलिए याचिका का निपटारा कर दिया गया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि सीसीटीवी फुटेज गायब होने, रिकॉर्डिंग कटने और आधिकारिक रिकॉर्ड में अनियमतताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसकी स्वतंत्र जांच होना बेहद जरूरी है ताकि यह साफ हो सके कि यह महज एक तकनीकी खामी थी या इसके पीछे किसी अधिकारी की लापरवाही अथवा बदनियती शामिल थी।