Thursday, 22 October 2026
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‘गलत जगह पकड़ लिया चाचा’, जिम कॉर्बेट पार्क में साथी जवान को दबोचे बैठा था बाघ; लाठी मारकर भगाया

INT News22 October 2026 at 02:43 pm

उत्तराखंड के रामनगर में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के घने जंगल में बाघ ने 28 वर्षीय वनकर्मी पीतांबर पर अचानक हमला कर दिया। बाघ ने उसे जमीन पर दबोच लिया। मौत सामने थी, लेकिन साथी रामनाथ ने ऐसा हौसला दिखाया कि बाघ को उसे छोड़कर भागना पड़ा। रामनाथ ने हाथ में पकड़ी लाठी से बाघ पर तीन वार किए। जान बचने के बाद पीतांबर ने उनसे कहा, “गलत जगह पकड़ लिया चाचा।” उनका इशारा गर्दन की ओर था, जहां बाघ ने उसे काटा था।जानकारी के अनुसार, 20 जुलाई को पीतांबर चार सदस्यीय टीम के साथ जंगल में नियमित गश्त पर निकला था। टीम के दो सदस्य आगे चल रहे थे, जबकि रामनाथ उनके बीच में थे। अचानक रामनाथ को अहसास हुआ कि पीतांबर साथ नहीं है। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो बाघ पीतांबर के ऊपर था। रामनाथ के पास मदद बुलाने या हालात समझने का समय नहीं था। उन्होंने तुरंत हाथ में मौजूद लाठी से बाघ पर तीन वार कर दिए। बाघ पीतांबर को छोड़कर झाड़ियों में चला गया।काशीपुर रेफर किया गयाइसके बाद रामनाथ ने पीतांबर से कहा, “मेरा हाथ पकड़ो।” उन्होंने उसे उठाया और वहां से सुरक्षित जगह ले जाने में मदद की। बाघ के काटने से पीतांबर की गर्दन पर चोट आई थी, लेकिन घाव ज्यादा गहरा नहीं था। वनकर्मियों ने पहले उसे प्राथमिक उपचार दिया, फिर रामनगर और वहां से काशीपुर ले जाकर इलाज कराया। जंगल में बनी चौकी घटनास्थल से करीब 300-400 मीटर दूर थी और मुख्य जंगल के भीतर लगभग 18 किलोमीटर अंदर स्थित थी।जंगल में बाघ के हमले का डर हमेशा रहता है: वनकर्मीकॉर्बेट में वनकर्मियों की नौकरी कितनी जोखिम भरी है, इसका अंदाजा उनके रोजाना के काम से लगाया जा सकता है। 37 साल से वन विभाग में काम कर रहे फॉरेस्टर धर्मपाल नेगी ने पीटीआई से कहा कि गश्त पर निकलते समय हर कर्मचारी के मन में यह आशंका रहती है कि चार लोग जंगल में जा रहे हैं, लेकिन लौटकर शायद तीन ही आएं। कई बार हमलों में जान गंवाने वाले कर्मचारियों को लोग जल्द भूल जाते हैं। कुछ मामलों में उनके शव तक नहीं मिल पाए।करीब 700 वनकर्मी, ज्यादातर दिहाड़ी मजदूरकरीब 1,300 वर्ग किलोमीटर में फैले कॉर्बेट पार्क में लगभग 700 वनकर्मी गश्त करते हैं। इसमें 500 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का कोर एरिया भी शामिल है। अधिकतर कर्मचारी दिहाड़ी मजदूर हैं। वे चार-चार लोगों के समूह में अलग-अलग पालियों में पैदल गश्त करते हैं। इनमें से केवल एक कर्मचारी के पास बंदूक होती है, जबकि बाकी लकड़ी के डंडों के सहारे जंगल में जाते हैं।बाघ के हमले के बाद बढ़ाई गई निगरानीधर्मपाल नेगी के मुताबिक, इस घटना में रामनाथ की सूझबूझ सबसे अहम रही। अगर वह चिल्लाते या शोर मचाते तो बाघ उनकी ओर भी मुड़ सकता था। पीतांबर को बचाने के बाद भी बाघ कुछ देर तक दहाड़ता रहा और आसपास घूमता रहा। इसके बाद अतिरिक्त वनकर्मियों को मौके पर भेजा गया, रास्ते के आसपास की झाड़ियों को साफ किया गया और बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए।