Thursday, 22 October 2026
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कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर, नोटबंदी पर मोदी सरकार की आलोचना से लेकर SIR के विरोध तक, जानें सबकुछ

INT News22 October 2026 at 02:43 pm

“हर गली में जंतर-मंतर! शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लोकतंत्र की बहाली के लिए जन मार्च है. आइए, चुनौती का सामना करने के लिए खड़े हों.”

यह बात परकला प्रभाकर ने 21 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखी. चुनाव आयोग की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 23 अक्टूबर को ‘पीपुल्स मार्च टू रिस्टोर डेमोक्रेसी’ निकाला जाएगा.

इसमें परकला प्रभाकर भी शामिल होंगे. प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर एसआईआर प्रक्रिया खत्म करने की मांग करेंगे.

सबसे पहले ग्राफिक्स में परकला प्रभाकर के बारे में जानिए-

विजयवाड़ा से लंदन तक हुई परकला प्रभाकर की पढ़ाई

परकला प्रभाकर ने विजयवाड़ा के आंध्र लोयोला कॉलेज से बीए किया. इसके बाद उन्होंने दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से एमए और एमफिल की पढ़ाई पूरी की. आगे की पढ़ाई के लिए वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स गए. साल 1991 में उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की.

JNU में हुई थी परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण की पहली मुलाकात

जुलाई 2014 में टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर छपी. इसके अनुसार, परकला प्रभाकर अपने पिता की तरह राजनीति में सफल नहीं हो सके, तो उन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में दाखिला लिया. यहां उनकी मुलाकात निर्मला सीतारमण से हुई. दोनों JNU के ‘फ्रीथिंकर्स’ नाम के समूह से जुड़े थे, जहां अलग-अलग राजनीतिक विचारों पर चर्चा होती थी.

इसी दौरान दोनों करीब आए और शादी कर ली. इसके बाद वे लंदन चले गए. वहां प्रभाकर ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी की. वहीं, निर्मला सीतारमण ने कुछ समय डेकोर की एक दुकान में सेल्सवुमन के तौर पर काम किया. बाद में वह प्राइसवाटरहाउसकूपर्स में पूर्वी यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं पर रिसर्च करने लगीं.

dea.gov.in वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के अनुसार, परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण की शादी 12 सितंबर 1986 को हुई.

बेटी के जन्म के बाद हैदराबाद लौट आए थे परकला और निर्मला सीतारमण

1990 के दशक की शुरुआत में बेटी के जन्म के बाद परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण हैदराबाद और नरसापुर लौट आए. उनकी बेटी इकलौती संतान हैं. हैदराबाद में प्रभाकर ने मार्केटिंग रिसर्च एजेंसी शुरू की. उन्होंने अपने पिता की याद में एक ट्रस्ट भी बनाया. इसके अलावा, प्रभाकर और निर्मला सीतारमण ने मिलकर ‘प्रणव’ नाम से एक स्कूल की शुरुआत की.

कांग्रेस से बीजेपी और फिर चिरंजीवी की पार्टी में गए थे परकला प्रभाकर

परकला प्रभाकर ने 1994 में कांग्रेस के टिकट पर आंध्र प्रदेश की नरसापुर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से उनके करीबी संबंध बने. प्रभाकर ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया.

साल 2008 में वह अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी के साथ प्रजा राज्यम पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए. हालांकि, बाद में पार्टी से निराश होकर उन्होंने इससे दूरी बना ली.

परकला प्रभाकर का परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है. उनकी मां कांग्रेस की विधायक थीं, जबकि उनके पिता परकला शेषावतारम 1970 के दशक में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे थे.

"मोदी सरकार का नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगाने का दावा सही नहीं'

सितंबर 2023 में परकला प्रभाकर ने अपनी किताब The Crooked Timber of New India के बारे में बताते हुए नोटबंदी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर नोटबंदी से सुशासन को कोई फायदा हुआ होता, तो केंद्र सरकार इसकी उपलब्धियों का जमकर प्रचार करती. उन्होंने यह भी कहा कि कारोबारी काला धन नकद रखने के बजाय जमीन और प्रॉपर्टी में लगाते हैं. ऐसे में नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगाने का दावा सही नहीं लगता.

भारत में बेरोजगारी दर 24 फीसद है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा

जनवरी 2024 को मंगलुरु में गणतंत्र दिवस पर ‘रिपब्लिक इन क्राइसिस’ कार्यक्रम में परकला प्रभाकर ने दावा किया कि भारत में बेरोजगारी दर 24% है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. उनके मुताबिक, ईरान, सीरिया और लेबनान में भी ऐसी ही स्थिति है, जबकि बांग्लादेश में बेरोजगार युवाओं की दर 12% है. उन्होंने जनवरी 2022 का उदाहरण देते हुए बताया कि रेलवे में 35 हजार गैर-तकनीकी पदों के लिए 1.25 करोड़ से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था. इससे बिहार और उत्तर प्रदेश में युवाओं के बीच भारी नाराजगी और हंगामा हुआ था.

न्यू इंडिया में लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सिमटा, चर्चा से बचती है केंद्र सरकार

नवंबर 2023 में परकला प्रभाकर ने दावा किया कि देश में निजी निवेश घटा है और आर्थिक असमानता बढ़ी है. उन्होंने कहा कि गरीबों का जीवन स्तर गिर रहा है और मध्यम वर्ग के कुछ लोग भी गरीबी की ओर बढ़ रहे हैं. परकला प्रभाकर ने कहा, “न्यू इंडिया में लोकतंत्र को सिर्फ हर पांच साल में होने वाले चुनाव तक सीमित कर दिया गया है. केंद्र सरकार चर्चा करने में विश्वास नहीं रखती, जबकि किसी भी लोकतंत्र का असली आधार बातचीत और विचार-विमर्श ही है.”

परकला प्रभाकर का ‘मिडवीक मैटर्स’ यूट्यूब चैनल है फेमस

परकला प्रभाकर ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है. वह 2014 से 2018 तक आंध्र प्रदेश सरकार में कम्युनिकेशन कंसल्टेंट रहे. इस दौरान उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला था. फिलहाल वह हैदराबाद स्थित कंपनी राइटफोलियो (RightFOLIO) के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. वह समसामयिक मुद्दों (कंटेंपरेरी इश्यूज) पर नियमित रूप से लिखते हैं. साथ ही राजनीति, अर्थव्यवस्था व समाज से जुड़े विषयों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं. उनका यूट्यूब चैनल ‘मिडवीक मैटर्स’ भी काफी फेमस है, जहां वह देश के मौजूदा हालात पर चर्चा करते हैं. इस चैनल पर 58 K सब्सक्राइबर हैं.