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UP Voter List: राशन कार्ड से तलाशे जाएंगे छूटे हुए वोटर! योगी सरकार के हर जिले में चुनाव आयोग का विशेष अभियान, 12 नवंबर से शुरू होगी नई कवायद

UP News: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने और छूटे हुए लोगों को वोटर बनाने के लिए नई रणनीति तैयार की है. अब सिर्फ पुराने वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड के भरोसे नहीं रहा जाएगा, बल्कि राशन की दुकानों पर उपलब्ध लाभार्थियों के रिकॉर्ड से भी पात्र मतदाताओं की पहचान की जाएगी. जिन लोगों की उम्र 18 साल या उससे अधिक है, लेकिन उनका नाम विधानसभा की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें वोटर बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. इसके लिए राशन कार्ड के लाभार्थियों की सूची का इस्तेमाल होगा. साथ ही पंचायत और नगर निकाय की मतदाता सूचियों का विधानसभा वोटर लिस्ट से मिलान किया जाएगा. चुनाव आयोग की इस पहल से उन लोगों को मतदाता सूची में शामिल होने का मौका मिलेगा, जो पात्र होने के बावजूद अब तक वोटर नहीं बन पाए हैं.
राशन की दुकानों से खोजे जाएंगे छूटे हुए मतदाता
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देश पर सभी जिलों में पात्र मतदाताओं की पहचान करने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी है. इसके तहत जिला निर्वाचन अधिकारियों को खाद्य एवं रसद विभाग की राशन दुकानों पर उपलब्ध लाभार्थियों की सूची की जांच करने को कहा गया है. इस सूची में ऐसे लाभार्थियों की पहचान की जाएगी, जिनकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है, लेकिन उनका नाम विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल नहीं है. ऐसे लोगों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने के लिए प्रेरित किया जाएगा. इसका उद्देश्य किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं रहने देना है.
पंचायत और नगर निकाय की वोटर लिस्ट से भी होगा मिलान
चुनाव आयोग की इस नई कवायद में पंचायत और शहरी निकायों की मतदाता सूचियों को भी शामिल किया गया है. प्रदेश में विधानसभा की मतदाता सूची और स्थानीय निकायों की मतदाता सूची का मिलान कराया जाएगा. दरअसल, अलग-अलग चुनावों के लिए तैयार होने वाली मतदाता सूचियों में मतदाताओं की संख्या में अंतर सामने आया है. ऐसे में दोनों सूचियों का मिलान कर उन पात्र लोगों की पहचान की जाएगी, जिनका नाम विधानसभा की वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं है.
महिलाओं के नाम जोड़ने के लिए घर-घर पहुंचेंगी आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है. इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद ली जाएगी. ये कार्यकर्ता अपने कार्यक्षेत्र में घर-घर जाकर ऐसी महिलाओं की पहचान करेंगी, जो मतदान के लिए पात्र हैं, लेकिन उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भी मदद ली जाएगी. इस अभियान के पीछे एक बड़ी वजह मतदाता सूची में महिलाओं का अनुपात कम होना है. अंतिम मतदाता सूची में प्रति 1000 पुरुष मतदाताओं पर महिलाओं की संख्या 834 दर्ज की गई थी, जबकि वर्ष 2025 की सूची में यह आंकड़ा 877 था.
18-19 साल के युवाओं को वोटर बनाने पर विशेष जोर
पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी है. इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों की मदद ली जाएगी. खासकर 18 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए जागरूक किया जाएगा. इसके अलावा एनएसएस, एनसीसी, नेहरू युवा केंद्र, युवक मंगल दल और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जैसे संगठनों की मदद भी ली जाएगी. शिक्षण संस्थानों में संचालित इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के माध्यम से युवाओं को मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी.
12 नवंबर से शुरू होगी विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश में विधानसभा मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision-2027) की शुरुआत 12 नवंबर से होगी. इसके तहत एकीकृत मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा. इसके बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के लिए दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी. इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा. इसके बाद 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम है.
यूपी में 13.39 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की होगी अहम भूमिका
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद उत्तर प्रदेश की अंतिम विधानसभा मतदाता सूची में करीब 13.39 करोड़ मतदाता दर्ज हैं. अब नए अभियान के जरिए पात्र लेकिन छूटे हुए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही है. चुनाव आयोग की इस पहल में राशन कार्ड के रिकॉर्ड, पंचायत और नगर निकाय की मतदाता सूचियां, आशा-आंगनबाड़ी नेटवर्क और शैक्षणिक संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इससे मतदाता सूची को अधिक समावेशी बनाने और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.