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सीवान में फिर तेजाब कांड, 22 साल पुरानी शहाबुद्दीन के दौर की खौफनाक वारदात हुई ताजा

Siwan Acid Attack बिहार के सीवान में एक बार फिर तेजाब कांड का मामला सामने आया है. जीबी नगर थाना क्षेत्र के सरैया गांव में 30 वर्षीय मोहम्मद नदीम हुसैन पर तेजाब डालने और फिर उसे दुकान के अंदर बंद कर देने का आरोप उसके बहन ने लगाया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, गंभीर रूप से झुलसे नदीम की इलाज के दौरान मौत हो गयी. हालांकि, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है. इस घटना ने एक बार फिर सीवान के चर्चित चंदा बाबू तेजाब कांड की याद ताजा कर दी है.
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शहाबुद्दीन के खौफ का दौर
वर्ष 2004 में हुए उस खौफनाक तेजाब कांड ने न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था. रंगदारी की रकम नहीं देने पर एक ही परिवार के तीन बेटों को अगवा कर उनके दो बेटों की बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी. बाद में तीसरे की भी हत्या कर दी थी.हत्या का तरीका और इस मामले में सामने आया नाम इतना चर्चित हुआ कि यह घटना देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गयी. इस हत्याकांड में सीवान के तत्कालीन बाहुबली पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का नाम सामने आया था. एक दौर ऐसा था, जब सीवान में उनके नाम का खौफ था और अपराध की दुनिया में उनका दबदबा कायम था.
2.5 लाख रुपये की रंगदारी नहीं देने पर शुरू हुआ था विवाद
16 अगस्त 2004 की सुबह करीब 10 बजे की बात है. पुलिस की केस डायरी में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, शहाबुद्दीन के गुर्गे आफताब, झब्बू मियां, राजकुमार शाह, शेख असलम, मोनू उर्फ सोनू उर्फ आरिफ हुसैन और मकसूद मियां चंदा बाबू की दुकान पर पहुंचे थे. उन्होंने रंगदारी के रूप में 2.5 लाख रुपये की मांग की. चंदा बाबू ने रकम देने से इनकार कर दिया. बताया जाता है कि उनके बेटे सतीश ने 30 हजार रुपये देने की पेशकश की थी, लेकिन आरोपी 2.5 लाख रुपये से कम लेने को तैयार नहीं थे. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया. आरोप है कि शहाबुद्दीन के गुर्गों ने सतीश के साथ मारपीट शुरू कर दी और दुकान के गल्ले में रखे दो लाख रुपये से अधिक की रकम निकाल ली. मारपीट की सूचना मिलने पर सतीश का भाई राजीव भी दुकान पहुंच गया.
बाथरूम से तेजाब लाकर हमलावरों पर फेंका
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, राजीव बाथरूम से मग में तेजाब लेकर आया और हमलावरों पर फेंक दिया. इससे दुकान में अफरा-तफरी मच गयी. तेजाब के कुछ छींटे राजीव पर भी पड़े. इसी दौरान हमलावर सतीश को अपने साथ लेकर चले गये. बताया जाता है कि वे उसे शहाबुद्दीन के पैतृक गांव प्रतापपुर ले गये. इसके बाद सतीश के दूसरे भाई गिरीश को भी अगवा कर लिया गया. राजीव किसी तरह वहां से भाग निकला, लेकिन बाद में उसे भी पकड़ लिया गया. इसके बाद तीनों भाइयों को शहाबुद्दीन के सामने पेश किया गया. आरोप है कि वहां इस मामले में फैसला सुनाते हुए विरोध करने वालों को सबक सिखाने का आदेश दिया गया. इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया.
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तेजाब से भरी बाल्टी उड़ेलकर दोनों भाइयों की हत्या
आरोप है कि शहाबुद्दीन के गुर्गों ने सतीश और गिरीश पर तेजाब से भरी बाल्टी उड़ेल दी. राजीव के सामने ही दोनों भाई तड़पते रहे और आखिरकार उनकी मौत हो गयी. इसके बाद भी अपराधियों की दरिंदगी नहीं रुकी. दोनों के शवों के टुकड़े कर उन्हें बोरों में भरा गया और नदी में फेंक दिया गया. राजीव किसी तरह वहां से भागने में सफल रहा. वह उत्तर प्रदेश के पडरौना पहुंचा और वहां स्थानीय सांसद के घर में शरण ली.
शादी के 18वें दिन राजीव की भी गोली मारकर हत्या
सतीश और गिरीश की हत्या के मामले में राजीव अहम गवाह था. उसने अदालत में बयान दिया था, जिसके बाद शहाबुद्दीन को तेजाब कांड में दोषी ठहराया गया. लेकिन परिवार की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. 16 जून 2014 को राजीव की गोली मारकर हत्या कर दी गयी. यह हत्या उसकी शादी के महज 18वें दिन सीवान के डीएवी मोड़ के पास हुई थी. इस तरह चंदा बाबू के तीनों बेटों की हत्या हो चुकी थी. परिवार में अब चंदा बाबू और उनकी पत्नी कलावती देवी ही बचे थे.
कलावती देवी ने मुफस्सिल थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. इसमें शहाबुद्दीन और उनके बेटे ओसामा का नाम सामने आया था. इस हत्याकांड ने एक बार फिर सीवान में अपराध और उसके कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर सवाल खड़े कर दिये थे. उस वक्त अपने तीनों बेटों को खो चुके चंदा बाबू ने दर्द बयां करते हुए कहा था- 'मैं तीन बार मारा गया हूं.'
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