Thursday, 5 November 2026
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किसानों की समस्या सुनने अब गांव-खेतों तक जायेंगे कृषि अधिकारी, सचिव ने दिया निर्देश

INT News5 November 2026 at 06:56 pm

रांची: किसानों की खुशहाली और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कृषि विभाग के अधिकारी कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और खेतों तक पहुंचकर किसानों की समस्याओं का समाधान करें. किसानों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का पूरा लाभ मिले, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबु बकर सिद्दीख पी ने गुरुवार को पशुपालन भवन, हेसाग में आयोजित खेत बचाओ अभियान सह राज्य स्तरीय रबी कर्मशाला-2026 में यह बात कही.

उन्होंने जिला स्तरीय पदाधिकारियों को किसानों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रियता से काम करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को विभिन्न प्रकार की सब्सिडी भी उपलब्ध करायी जा रही है. ऐसे में अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों को योजनाओं की सही जानकारी मिले और वे उनका अधिकतम लाभ उठा सकें.

दो प्रमुख विषयों पर केंद्रित है इस वर्ष की कर्मशाला

कृषि सचिव ने कहा कि इस वर्ष की कर्मशाला मुख्य रूप से दो विषयों-खेत बचाओ अभियान और रबी कर्मशाला पर केंद्रित है. प्रत्येक वर्ष रबी कर्मशाला में फसल उत्पादकता, फसल सघनता, सिंचाई और बाजार संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा की जाती है. इस बार खेतों की उर्वरता एवं स्वास्थ्य बनाए रखने, परती भूमि का बेहतर उपयोग करने, उर्वरकों का सीमित और सुरक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित करने तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि कृषि विकास के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान करना भी जरूरी है. इसके लिए सभी जिलों में सिंचाई व्यवस्था से संबंधित अद्यतन आंकड़े तैयार करने को कहा गया. जिलों में उपलब्ध तालाबों, नहरों और अन्य सिंचाई संसाधनों का संशोधित डेटा तैयार कर उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाये. इससे किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

परती भूमि में फसल आच्छादन बढ़ाने पर जोर

कर्मशाला को संबोधित करते हुए कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने राज्य में परती भूमि का अधिकतम उपयोग करने और वहां फसल आच्छादन का क्षेत्र विस्तार करने की आवश्यकता बतायी. उन्होंने कहा कि इससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है. साथ ही मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण और सतत कृषि विकास के लिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है.

उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों से तकनीकी सत्रों में सक्रिय भागीदारी करने तथा कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा साझा किये जा रहे तकनीकी ज्ञान का लाभ उठाने का आह्वान किया.

भूमि की उर्वरा शक्ति बचाना जरूरी : कुलपति

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सीएस दुबे ने कहा कि खेत बचाओ अभियान सह रबी कर्मशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को भूमि का स्वास्थ्य और उसकी उर्वरा शक्ति बनाए रखने के प्रति जागरूक करना है. भूमि की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहेगी, तभी किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी. उन्होंने भूमि संरक्षण के विभिन्न उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ मिट्टी की सेहत पर ध्यान देना भी जरूरी है.

कार्यक्रम में मृदा निदेशक विकास कुमार, निदेशक समिति रमाशंकर प्रसाद, गव्य निदेशक संजीव कुमार सहित विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों ने भी विचार रखे. इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न जिलों के जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि एवं संबद्ध विभागों के मुख्यालय और जिला स्तर के अधिकारी तथा कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे