Thursday, 5 November 2026
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UGC के जातिगत भेदभाव वाले नियमों पर फिर होगा विचार, केंद्र सरकार बनाएगी कमेटी

INT News5 November 2026 at 02:37 pm

गुरुवार (5 नवंबर 2026) को सुप्रीम कोर्ट में UGC के मामले की सुनवाई हुई. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर कमेटी बनाने पर विचार कर रही है. इसका उद्देश्य छात्रों की चिंताओं का समाधान करना और सभी के हितों की रक्षा करना है.

सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए टाली सुनवाई

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी.

यह मामला UGC के 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026' से जुड़ा है. आयोग ने इन नियमों को 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया था. इनका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकना और समानता सुनिश्चित करना था.

जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी थी रोक

नए नियम लागू होने के बाद इनके कुछ प्रावधानों को लेकर विवाद शुरू हो गया था. खासकर नियम 3(1)(c) में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा पर सवाल उठाए गए थे. इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के खिलाफ जाति या जनजाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को शामिल किया गया था.

कुछ याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि इस प्रावधान से सामान्य वर्ग के छात्रों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलेगी. उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इन नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी. तब तक 2012 के पुराने नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया गया था.

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रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने दायर की थी याचिका

यह मामला रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की ओर से 2019 में दायर याचिका से भी जुड़ा है. दोनों की मौत के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी.

अब केंद्र सरकार नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने पर विचार कर रही है. हालांकि, अभी नए नियमों में बदलाव या कमेटी के गठन को लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.