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कराते प्रतियोगिता में बालिका घायल, सांस लेने में दिक्कत:मौके पर नहीं थी एंबुलेंस और डॉक्टर व्यवस्था, अधिकारी ने मानी व्यवस्था में चूक
बालाघाट में जिलास्तरीय कराते प्रतियोगिता के दौरान एक बालिका खिलाड़ी गंभीर रूप से घायल हो गई। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में महिला ट्रेनर को बालिका को हाथ में उठाकर निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। यह घटना शनिवार को हुई, जहां घायल बालिका का इलाज जारी है। घायल बालिका की पहचान श्रेया घरते के रूप में हुई है। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी के पंच लगने से श्रेया को गंभीर चोट आई। महिला ट्रेनर जयश्री सोनवाने ने अपने एक पुरुष साथी के साथ श्रेया को तत्काल पास के एक निजी अस्पताल पहुंचाया। मेडिकल सहायता और रेफरी पर सवाल ट्रेनर जयश्री सोनवाने ने प्रतियोगिता आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आक्रामक खेल कराते में खिलाड़ियों के चोटिल होने की आशंका रहती है, लेकिन प्रतियोगिता में तत्काल मेडिकल सहायता और मान्यता प्राप्त रेफरी मौजूद नहीं थे। सोनवाने ने इसके लिए सीधे शिक्षा विभाग और जिला क्रीड़ा अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि दूसरे बाउट में प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी लगातार नियमों के विपरीत श्रेया पर पंच मार रही थी, जिसे रेफरी ने नहीं देखा। इससे बालिका की नाक पर पंच लगा और वह मूर्च्छित होकर सांस लेने में दिक्कत महसूस करने लगी। जिला खेला अधिकारी ने दी सफाई इस मामले में जिला क्रीड़ा अधिकारी दीपक गिरी ने प्रतियोगिता के दौरान चिकित्सीय सुविधा न होने की अपनी गलती स्वीकार की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग में कराते शिक्षक न होने के कारण, कराते प्रशिक्षकों को ही रेफरी बनाया गया था, जिन्हें खेल में हो रही गलतियों पर ध्यान देना था। यह पहली बार नहीं है जब स्कूल शिक्षा विभाग के खेल कैलेंडर के अनुसार होने वाले जिलास्तरीय खेलों में ऐसी अव्यवस्था सामने आई है। अक्सर जिम्मेदार अधिकारी रेफरी के भरोसे खेल छोड़ देते हैं। इसके अलावा, खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के दौरान भोजन और किट जैसी आवश्यक सुविधाएं भी कम ही मिल पाती हैं। जबकि इसका सारा खर्च ना केवल बच्चों की फीस से जमा होता है, बल्कि शासन भी प्रतियोगिता के लिए राशि जारी करता है। अब देखना है कि जिम्मेदार, विभाग की छवि पर लग रहे डेंट पर किस तरह का एक्शन लेते है।