Saturday, 1 August 2026
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मस्जिद में इमामत कराने गया, साफ करना पड़ा टॉयलेट:फैजान बोले- लौटने का मौका नहीं मिलता तो सुसाइड कर लेता, सुनाई भूख-बेइज्जती की दास्तां

INT News1 August 2026 at 06:53 pm

मैं मस्जिद में इमामत कराने गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही मुझे 40 कमरों वाले मिनिस्ट्री ऑफिस की सफाई में लगा दिया गया। रोज टॉयलेट साफ करता था, बर्तन धोता था, 14-15 घंटे काम करता था। कई-कई दिन भूखा रहता था। ऐसा लगता था कि मर जाऊं... सुसाइड कर लूं। यह दर्द रायसेन जिले के दीवानगंज निवासी मोहम्मद फैजान का है। बेहतर भविष्य और धार्मिक सेवा का सपना लेकर वह ओमान गए थे, लेकिन वहां उनकी जिंदगी एक ऐसी कैद में बदल गई, जहां न सम्मान था, न वेतन और न ही दो वक्त की रोटी की गारंटी। करीब ढाई महीने तक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलने के बाद भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन की पहल पर भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप से उनकी सुरक्षित वतन वापसी हो सकी। जनवरी में मिला एजेंट, बोला- मस्जिद में इमामत कराओगे फैजान बताते हैं कि जनवरी 2026 में उनकी मुलाकात एक एजेंट से हुई। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि ओमान की एक मस्जिद में उन्हें इमामत (नमाज पढ़ाने) का काम मिलेगा। पहले 20 हजार रुपए लिए गए और मेडिकल प्रक्रिया के दौरान 1 लाख 80 हजार रुपए और जमा करा लिए गए। परिवार ने करीब दो लाख रुपए का इंतजाम कर उन्हें विदेश भेजा। 4 मई 2026 को वह ओमान के मस्कट पहुंचे। दो दिन कंपनी में रखा, फिर 40 कमरों की सफाई में लगा दिया फैजान बताते हैं कि मस्कट पहुंचने के बाद कंपनी ने उन्हें दो-तीन दिन अपने पास रखा। इसके बाद उन्हें एक मिनिस्ट्री ऑफिस में भेज दिया गया। वह कहते हैं, "जिस काम के लिए गया था, वह कभी मिला ही नहीं। वहां 30 से 40 कमरों वाले मिनिस्ट्री ऑफिस की सफाई कराई जाती थी। सभी कमरों के टॉयलेट, बाथरूम, कमरे, बर्तन और बाकी सफाई का पूरा काम मुझे करना पड़ता था।" 14-15 घंटे की ड्यूटी... लेकिन खाने तक के पैसे नहीं फैजान के मुताबिक उनसे रोज 14 से 15 घंटे तक काम कराया जाता था। इसके बावजूद कंपनी ने न वेतन दिया और न खाने के लिए पैसे। जब भी वह पैसे मांगते, जवाब मिलता- “अभी नहीं हैं, बाद में देंगे।” धीरे-धीरे जेब खाली हो गई। कई बार लगातार चार-चार दिन तक भूखे रहने की नौबत आ गई। भारतीयों ने खिलाया खाना, तभी बच सकी जिंदगी भूख से बेहाल फैजान की मदद कंपनी ने नहीं, बल्कि वहां रहने वाले भारतीयों ने की। मस्कट में रहने वाले नवाब भाई ने उन्हें खाने के लिए पैसे दिए, जबकि मोहम्मद खलील अहमद उन्हें अपने घर ले गए। करीब डेढ़ महीने तक उन्होंने अपने पास रखा और भारतीय दूतावास तक भी साथ लेकर गए। फैजान कहते हैं कि अगर उन लोगों का सहारा नहीं मिलता तो शायद वह जिंदा वापस नहीं लौट पाते। रोज लगता था... अब मर जाऊं फैजान बताते हैं कि लगातार अपमान, भूख और बेबसी ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था। वह कहते हैं, “बहुत परेशान था। लगता था कि मर जाऊं... सुसाइड कर लूं। कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। लेकिन मां-बाप का ख्याल आ जाता था, इसलिए खुद को रोक लेता था।” उन्होंने शुरुआत में घरवालों से अपनी परेशानी छिपाई, लेकिन जब हालात असहनीय हो गए तो परिवार को पूरी सच्चाई बताई। एजेंट ने मदद करने के बजाय नंबर ही ब्लॉक कर दिया फैजान के अनुसार मई के आखिर और जून की शुरुआत तक उन्होंने कई बार एजेंट से संपर्क किया। एजेंट हर बार "एक-दो दिन इंतजार करो" कहकर टालता रहा और बाद में उनका नंबर ही ब्लॉक कर दिया। जब कंपनी से भारत लौटने की बात कही तो 650 रियाल जमा कराने की शर्त रख दी गई। आबिद हुसैन तक पहुंचा मामला, उसी दिन दूतावास हरकत में आया 18 जुलाई को फैजान का मामला भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन तक पहुंचा। उन्होंने उसी दिन भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के अधीन भारतीय प्रवासी सहायता केंद्र को शिकायत भेज दी। दूतावास ने तत्काल फैजान को बुलाकर दस्तावेजी प्रक्रिया शुरू कराई। बाद में लेबर कोर्ट से एग्जिट परमिट मिला। 26 जुलाई को भारतीय दूतावास ने ई-मेल भेजकर पुष्टि की कि फैजान की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 28 जुलाई की रात वह मुंबई पहुंचे और 30 जुलाई की रात अपने घर दीवानगंज लौट आए। पासपोर्ट भी कंपनी ने रख लिया था आबिद हुसैन के मुताबिक कंपनी ने फैजान का पासपोर्ट भी अपने कब्जे में रख लिया था। दूतावास के हस्तक्षेप के बाद दस्तावेज वापस मिले और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर उनकी घर वापसी संभव हो सकी। 1500 से ज्यादा भारतीयों की मदद कर चुके हैं आबिद हुसैन भोपाल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन पिछले कई वर्षों से विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद कर रहे हैं। उनके मुताबिक अब तक वे करीब 1500 भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी में सहयोग कर चुके हैं। फैजान के मामले में भी उन्होंने भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और भारतीय प्रवासी सहायता केंद्र से समन्वय कर पूरी प्रक्रिया तेज कराई। उनका कहना है कि सही समय पर शिकायत और दस्तावेज उपलब्ध होने पर अधिकांश मामलों में भारतीय दूतावास प्रभावी कार्रवाई करता है। ये खबर भी पढ़ें… बंटी-बबली गिरफ्तार, विदेशी कंपनी में ऑनलाइन जॉब के नाम पर ठगी करते थे मध्य प्रदेश के गंजबासौदा से स्टेट साइबर की टीम ने फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। आरोपी फिल्म बंटी और बबली की तर्ज कर ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे और क्वीकर.जॉब नाम से फर्जी कंपनी का संचालन कर रहे थे। आईटी सेक्टर में विदेशी कंपनी में युवाओं को जॉब दिलाने के नाम पर ठगी करते थे।पूरी खबर पढ़ें