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कपूरथला में कुत्तों ने 6 बच्चों समेत 15 को काटा:घायल सिविल अस्पताल में भर्ती, नगर निगम के पास पकड़ने के लिए टीम ही नहीं
कपूरथला के मार्कफेड चौक और आसपास के मोहल्लों में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से शहरवासियों में भारी दहशत का माहौल है। बीते दो दिनों में ही खूंखार आवारा कुत्तों ने हमला कर छह बच्चों समेत 15 से अधिक लोगों को बुरी तरह नोचकर घायल कर दिया है। सभी घायलों को इलाज के लिए कपूरथला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लोगों को कहना है कि लगातार कुत्तों को आतंक बढ़ता जा रहा है। मोहल्लों में इनकी संख्या भी बढ़ रही है। शिकायत को बाद भी नगर निगम और प्रशासन इसकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है। उधर नगर निगम प्रशासन का कहना है कि इस समस्या के समाधान का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि हमारे पर कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई टीम नहीं है। कुत्तों के हमले में घायल होने वाले मासूम बच्चों में तीन वर्षीय वरुणजोत सिंह, चार वर्षीय सत्यम, आठ वर्षीय अभीनूर सिंह, साढ़े तीन वर्षीय रेहू कुमारी और नौ वर्षीय मोनू कुमार शामिल हैं। इसके अलावा रीना देवी, रजिंदर कौर, संजीव कुमार, धर्मिंदर कुमार, अरविंदर माथो, रजिंदर कौर (पत्नी बलविंदर सिंह), रजिंदर कौर (पत्नी हरजिंदर सिंह), राजविंदर कौर और मुत्ती देवी भी कुत्तों का शिकार बनी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ ही दिन पहले मोहब्बत नगर इलाके में भी आवारा कुत्तों ने कई लोगों को काटा था, जिसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। नगर निगम के पास कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम नहीं घटना के बाद नगर निगम की लाचारी भी सामने आई है। निगम के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर जगदीप ने स्पष्ट किया कि उनके पास आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अपनी कोई विशेष टीम मौजूद नहीं है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर (DC) आकाश बंसल ने कहा कि वे इस संबंध में तुरंत निगम कमिश्नर से बातचीत कर स्थिति पर काबू पाने के निर्देश देंगे। दूसरी ओर, नगर निगम के एसओ तरलोचन सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और प्रभावित क्षेत्रों में जायजा लेने के लिए टीम भेजी गई है। शहरवासियों में रोष लगातार हो रहे हादसों से गुस्साए शहरवासियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि आवारा कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए तुरंत बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाए, ताकि लोग और मासूम बच्चे अपने ही घरों के बाहर सुरक्षित महसूस कर सकें।