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AI से मौत की फर्जी तस्वीर बनवाई, बकरे का शव जलाकर कराई तेरहवीं, डेढ़ साल तक पुलिस को देता रहा चकमा, ऐसे खुला राज

UP Crime News: (पवन तोमर की रिपोर्ट) उत्तर प्रदेश के मऊ में हत्या के एक मामले में सजा से बचने के लिए अपनी मौत का नाटक रचने का मामला सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, राजू उर्फ राजकुमार राजभर ने कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से अपनी मौत की फर्जी तस्वीर तैयार कराई और मृत्यु प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेजों के जरिए खुद को मृत साबित करने की कोशिश की. बकरे का शव जलाकर अंतिम संस्कार का दिखावा करने और तेरहवीं का कार्ड छपवाने की भी बात सामने आई है. करीब डेढ़ साल से उसकी तलाश कर रही पुलिस ने रविवार सुबह मऊ के ख्वाजाजहांपुर गांव से उसे गिरफ्तार कर लिया. अब पुलिस कथित फर्जी दस्तावेजों, बीमा भुगतान और मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
बकरे का शव जलाया, AI से तैयार कराई मौत की तस्वीर
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी मौत का भ्रम पैदा करने के लिए कथित तौर पर बकरे का शव जलाया और अंतिम संस्कार किए जाने का दिखावा किया. इसके बाद AI की मदद से अपनी चिता पर लेटे होने की तस्वीर तैयार कराई. जांच में श्मशान घाट की रसीद और नगर पालिका से जारी कथित मृत्यु प्रमाण पत्र का मामला भी सामने आया है. आरोपी ने इन दस्तावेजों के जरिए अपनी मौत साबित करने की कोशिश की थी. पुलिस के मुताबिक, वह पहचान छिपाने के लिए साधु का भेष धारण कर रहा था और लगातार ठिकाने बदल रहा था.
2016 में हुई थी भट्ठा मालिक योगेश सिंह की हत्या
मामला 19 दिसंबर 2016 का है. पुलिस के मुताबिक, मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास भट्ठा मालिक योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में राजकुमार राजभर और उसके साथी सुदर्शन राजभर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. बताया गया कि ईंटों की खरीद और रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था. योगेश सिंह के भतीजे अविनाश सिंह की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की थी.
सजा से बचने के लिए मौत का नाटक रचने का आरोप
पुलिस के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी को सजा होने का डर था. इसके बाद उसने खुद को मृत दिखाने की योजना बनाई. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 30 मई 2025 को गाजीपुर में उसकी मृत्यु दर्शाने की प्रक्रिया अपनाई गई थी. इसके बाद 11 जून को तेरहवीं का कार्ड भी छपवाया गया. कथित तौर पर इन गतिविधियों का उद्देश्य परिवार और अन्य लोगों के सामने उसकी मौत की कहानी को वास्तविक दिखाना था.
पत्नी को 10 लाख रुपये के बीमा भुगतान की जांच
इस मामले में आरोपी की पत्नी को कथित तौर पर करीब 10 लाख रुपये की बीमा राशि मिलने की जानकारी भी सामने आई है. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि बीमा कंपनी के समक्ष कौन से दस्तावेज पेश किए गए थे और भुगतान किस आधार पर किया गया. यह भी जांच की जा रही है कि कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल बीमा राशि हासिल करने के लिए किया गया था या नहीं. फिलहाल, बीमा भुगतान से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जरूरी है.
दो होम्योपैथिक डॉक्टरों की भूमिका की भी पड़ताल
पुलिस के मुताबिक, मामले में दो होम्योपैथिक डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. आरोपी ने कथित तौर पर दावा किया है कि उसे मौत का नाटक रचने का सुझाव इन्हीं डॉक्टरों ने दिया था. यह भी बताया गया है कि दोनों ने उसके ट्रेडिंग कारोबार में पैसा लगाया था. हालांकि, डॉक्टरों की भूमिका और आरोपी के दावे की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
ख्वाजाजहांपुर गांव से हुई गिरफ्तारी
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के मुताबिक, सिविल लाइंस पुलिस की टीम आरोपी की तलाश कर रही थी. लगातार ठिकाने बदलने के कारण उसे पकड़ने में मुश्किल हो रही थी. रविवार सुबह करीब नौ बजे ख्वाजाजहांपुर गांव में उसकी मौजूदगी की सूचना मिलने पर पुलिस ने दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया. अब पुलिस कथित फर्जी दस्तावेजों, AI से तैयार तस्वीर, बीमा भुगतान और अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता की जांच कर रही है.
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