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ब्रह्मलोकधाम में श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम : 51 जोड़ों ने थामा एक-दूजे का हाथ, 100 नर-नारायणों की हुई सेवा

जमशेदपुर : कदमा स्थित ब्रह्मलोकधाम में रविवार को पूज्य गुरुजी का जन्मोत्सव भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ मनाया गया. गुरुजी के जयकारों और भजन-कीर्तन से गूंजते आश्रम परिसर में कहीं विवाह के मंगलगीत सुनाई दिये, तो कहीं जरूरतमंदों की सेवा और सम्मान का भाव दिखा. जन्मोत्सव पर 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया. वहीं, गितीलता गांव से आये 100 नर-नारायणों को भोजन कराने के साथ कंबल, दक्षिणा और माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया. सामूहिक विवाह और नर-नारायण सेवा ने समारोह को खास बना दिया.
51 जोड़ों ने शुरू किया गृहस्थ जीवन का नया सफर
जन्मोत्सव पर झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों से आये 51 जोड़े विवाह बंधन में बंधे. इनमें पलामू, दुमका, पाकुड़, डाल्टनगंज और देवघर समेत अन्य स्थानों के जोड़े शामिल थे. विवाह समारोह में 700 परिजन भी शामिल हुए. ब्रह्मलोकधाम परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच वरमाला कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस दौरान नवदंपतियों को उपस्थित लोगों ने सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया. विवाह के बाद नवदंपतियों को वस्त्र, गृहस्थी में उपयोग होने वाली जरूरी सामग्री और अन्य उपहार भेंट किये गये. इसका उद्देश्य नवविवाहित जोड़ों को नये जीवन की शुरुआत में सहयोग देना था. उपहार पाकर नवदंपतियों और उनके परिजनों के चेहरों पर खुशी दिखी. आश्रम परिसर मंगलगीतों, आशीर्वाद और गुरुजी के जयकारों से गूंज उठा.
100 नर-नारायणों को भोजन कराकर किया सम्मानित
जन्मोत्सव के दौरान सेवा और समर्पण की भावना भी देखने को मिली। संध्या के समय गितीलता गांव से आये 100 नर-नारायणों को आदरपूर्वक भोजन कराया गया. इसके बाद उन्हें कंबल और दक्षिणा भेंट की गयी. माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया. आयोजन में शामिल शिष्यों ने सेवा भाव के साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया. कार्यक्रम के माध्यम से जरूरतमंदों की सेवा और मानवता के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया.
मंगल स्नान और भजन-कीर्तन से हुई शुरुआत
गुरुजी के जन्मोत्सव का शुभारंभ सुबह पांच बजे पूज्य श्री छोटे भैया जी द्वारा गुरुजी के मंगल स्नान के साथ हुआ. इसके बाद भव्य श्रृंगार और पुष्प स्नान संपन्न कराया गया. आश्रम में आयोजित भजन-कीर्तन में बड़ी संख्या में शिष्यों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. भक्ति गीतों और गुरुजी के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा.
केक कटिंग के बाद निकला भव्य नगर कीर्तन
जन्मोत्सव के अवसर पर केक कटिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया. इसमें भक्तों और शिष्यों ने सामूहिक रूप से भाग लिया. दिन के अंतिम चरण में भव्य नगर कीर्तन निकाला गया. भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आये. पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहयोग और मानव सेवा की भावना प्रमुखता से दिखाई दी. ब्रह्मलोकधाम में आयोजित जन्मोत्सव ने यह संदेश दिया कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता करने, परिवारों को नयी शुरुआत का अवसर देने और मानवता की सेवा करने में भी निहित है.