समाचार · मध्य प्रदेश
बैंक ने FDR जारी करने से किया इनकार:फिर भी मिला शराब ठेका; रायचूरा समेत अन्य जिम्मेदारों की भूमिका की जांच, लोकायुक्त में FIR दर्ज
भोपाल में शराब दुकान का ठेका हासिल करने के लिए 2 करोड़ 75 लाख 33 हजार 335 रुपए की कथित फर्जी एफडीआर जमा कराने का मामला सामने आया है। बैंक ने एफडीआर जारी करने से इनकार किया था, इसके बावजूद इसे प्रतिभूति के तौर पर स्वीकार कर लिया गया। अब लोकायुक्त संगठन इस मामले में जांच कर रहा है कि कथित फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी किस आधार पर मिली और इसमें कौन-कौन शामिल था। लोकायुक्त ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा और हरियाणा के झज्जर निवासी शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को आरोपी बनाया है। मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल की पीएंडटी चौराहा कंपोजिट शराब दुकान समूह के ठेके से जुड़ा है। आरोप है कि एफडीआर के साथ उसकी कथित फर्जी सत्यापन रिपोर्ट भी सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में इस्तेमाल की गई। पहले निलंबन, अब आपराधिक जांच विभागीय जांच के बाद रायचूरा को 12 अक्टूबर को निलंबित किया गया था। इससे पहले उन्हें उप मुख्यमंत्री के ओएसडी के अतिरिक्त प्रभार से भी मुक्त कर दिया गया था। अब लोकायुक्त की एफआईआर के बाद मामला विभागीय अनियमितताओं से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। FDR के सत्यापन और ठेका आवंटन की जांच जांच में यह पता लगाया जाएगा कि एफडीआर किसने तैयार कराई, बैंक के नाम पर सत्यापन रिपोर्ट किसने बनाई और दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों ने किन आधारों पर इन्हें स्वीकार किया। ठेका आवंटन और लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा सकती है। लोकायुक्त संगठन के अनुसार, जांच में दोनों नामजद आरोपियों के अलावा संबंधित सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी देखी जाएगी। जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें स्वीकार करने तक किसकी क्या भूमिका थी।