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करनाल में पुरानी पेंशन बहाली के लिए कर्मचारियों का प्रदर्शन:बोले- बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए ओपीएस जरूरी, ओपीएस चुनने का विकल्प मिले
पेंशन बहाली संघर्ष समिति, हरियाणा ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग को लेकर करनाल में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने जिला सचिवालय में डीसी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय मुख्य संगठन सचिव, नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) एवं प्रदेशाध्यक्ष पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा विजेंद्र सिंह धारीवाल ने ज्ञापन में पुरानी पेंशन को कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। समिति ने कहा कि कर्मचारी कई वर्षों से पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उनका दावा है कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) कर्मचारियों को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं देती। केंद्र सरकार ने इसकी कमियों को देखते हुए एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) का विकल्प दिया, लेकिन कर्मचारियों को इसमें भी कई खामियां नजर आ रही हैं। वर्ष 2025 के यूपीएस विनियमों के मसौदे का हवाला देते हुए समिति ने पुरानी पेंशन की तुलना में नई व्यवस्था पर सवाल उठाए। 25 साल की सेवा पर पूरी पेंशन की शर्त ज्ञापन के अनुसार, पुरानी पेंशन में अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन और महंगाई भत्ते में संशोधन का लाभ मिलता है। वहीं यूपीएस में पूरी पेंशन के लिए 25 साल की सेवा और निर्धारित कोष संबंधी शर्तें हैं। कर्मचारी का आरोप है कि वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत अंशदान देने के बावजूद सेवानिवृत्ति पर यह राशि वापस नहीं मिलती। बाजार के उतार-चढ़ाव से पेंशन प्रभावित होने, सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) की सुविधा नहीं होने और पारिवारिक पेंशन में अंतर पर भी चिंता जताई गई। चिकित्सा सुविधा और पेंशन नियमों पर भी सवाल समिति ने कहा कि यूपीएस में इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की पेंशन, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, एकमुश्त निकासी और चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसे मामलों में भी समस्याएं हैं। पेंशन निर्धारण में कई एजेंसियों की भूमिका और कागजी प्रक्रिया को भी परेशानी का कारण बताया। एनपीएस और यूपीएस के तहत सेवाकाल में मृत्यु होने तथा इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की स्थिति में मिलने वाले लाभों पर भी सवाल उठाए। ओपीएस चुनने का विकल्प देने की मांग समिति ने प्रधानमंत्री से मांग की कि कर्मचारियों को एनपीएस और यूपीएस के साथ पुरानी पेंशन योजना चुनने का विकल्प भी दिया जाए। इससे सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और कर्मचारियों की बचत का लाभ उन्हें मिल सकेगा।