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Gitanjali Express: 12 घंटे शव के साथ सफर करते रहे यात्री, अब 24 घंटे में रेलवे को देना होगा जवाब

जमशेदपुर: मुंबई से हावड़ा जा रही गीतांजलि एक्सप्रेस में यात्री की मौत के बाद करीब 12 घंटे तक शव कोच में पड़े रहने के मामले में दक्षिण-पूर्व रेलवे प्रशासन सख्त हो गया है. रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) ने चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम से 24 घंटे के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है. साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि ट्रेन के रास्ते में किन-किन स्टेशनों पर मदद मांगी गयी और समय पर सहायता क्यों नहीं पहुंची.
सुबह हुई यात्री की मौत, शाम तक नहीं मिली मदद
जानकारी के अनुसार, ट्रेन संख्या 12859 गीतांजलि एक्सप्रेस के एम-1 कोच में शनिवार सुबह करीब 8 बजे कैंसर पीड़ित यात्री बिनोद पासवान (45) की मौत हो गयी थी. इसकी सूचना टीटीई को दी गयी थी. इसके बावजूद ट्रेन के रास्ते में किसी स्टेशन पर शव को उतारने या आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं हो सकी.
इस दौरान ट्रेन करीब 12 घंटे की देरी से चल रही थी. यात्रियों को शव के साथ सफर करना पड़ा. कोच में दुर्गंध, बदहाल शौचालय और अन्य परेशानियों के बीच यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गयीं.
रेल मंत्री और रेल मदद पर शिकायत के बाद टाटानगर में उतारा गया शव
मामले में शाम करीब 7 बजे रेल मंत्री और रेल मदद के माध्यम से शिकायत की गयी. इसके बाद रात 8:26 बजे टाटानगर स्टेशन पर शव को ट्रेन से उतारा गया. यात्री की मौत के बाद इतनी देर तक सहायता नहीं मिलने को लेकर रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे.
जीएम ने डीआरएम से मांगा जवाब
मामले को गंभीरता से लेते हुए दक्षिण-पूर्व रेलवे के जीएम ने चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम को 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में यह बताना होगा कि यात्री की मौत की सूचना मिलने के बाद क्या कदम उठाये गये, किन स्टेशनों पर सहायता मांगी गयी और समय पर मदद क्यों नहीं पहुंची.
जीएम ने मामले में लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय करने के भी निर्देश दिये हैं. अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि यात्री की मौत के बाद सहायता पहुंचाने में देरी किन कारणों से हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था.