समाचार · उत्तर प्रदेश
शाहजहांपुर में 4.47 करोड़ के ई-वाहन एजेंसी में कैद, बिना चले ही 8.85 लाख का भुगतान! नगर आयुक्त ने मांगा जवाब

UP News, (पवन तोमर): शाहजहांपुर शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए खरीदे गए करोड़ों रुपये के ई-वाहन नगर निगम की लापरवाही के चलते महीनों तक एजेंसी में खड़े रहे. हैरानी की बात यह है कि वाहन सड़कों पर उतरे तक नहीं, लेकिन उनकी चार्जिंग के नाम पर 8.85 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया. इस मामले ने नगर निगम की खरीद प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और सरकारी धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला सामने आने के बाद नगर आयुक्त ने जांच के निर्देश दिए हैं.
करोड़ों की खरीद, फिर भी एजेंसी से नहीं उठे वाहन
जानकारी के मुताबिक, नगर निगम ने पिछले साल मई और अगस्त तथा इस साल जून में कूड़ा उठाने के लिए करीब 4.47 करोड़ रुपये की लागत से 30 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे थे. इन वाहनों की खरीद के लिए पूरा भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन उन्हें एजेंसी से लाकर नगर निगम के गोदाम में रखने और संचालन शुरू कराने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की गई. नतीजतन, सफाई व्यवस्था में इस्तेमाल होने के बजाय वाहन लंबे समय तक एजेंसी परिसर में ही खड़े रहे.
वाहन खड़े रहे, चार्जिंग बिल का भुगतान होता रहा
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल 8.85 लाख रुपये के चार्जिंग बिल को लेकर उठ रहे हैं. जब वाहन एजेंसी से निकलकर नियमित संचालन में आए ही नहीं थे, तो उनकी चार्जिंग के नाम पर इतनी बड़ी रकम का भुगतान किस आधार पर किया गया. बिल की जांच और भुगतान प्रक्रिया में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
नगर आयुक्त ने मांगा जवाब
मामला नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी के संज्ञान में आने के बाद संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया है. बताया जा रहा है कि जिम्मेदारी तय करने के बजाय कुछ अधिकारी एजेंसी की ओर से लिखित सूचना नहीं दिए जाने का तर्क दे रहे हैं. हालांकि, वाहनों की खरीद, सुपुर्दगी, भौतिक सत्यापन और भुगतान की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी, यह जांच का अहम विषय बन गया है.
पुलिस की मदद से एजेंसी से मंगवाए गए वाहन
नगर आयुक्त के निर्देश पर तिलहर पुलिस की मदद से सभी 30 वाहनों को एजेंसी से मंगवाकर नगर निगम के गोदाम में रखवाया गया है. अब इन्हें ककरा स्थित चार्जिंग स्टेशन भेजने की तैयारी है. अधिकारियों के मुताबिक, जरूरी मरम्मत और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वाहनों को कूड़ा उठाने के काम में लगाया जाएगा.
जांच से तय होगी जिम्मेदारी
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वाहनों का समय पर इस्तेमाल न होना और चार्जिंग के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान होना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है. अब निगाहें जांच पर टिकी हैं कि भुगतान किस आधार पर किया गया, वाहन एजेंसी में क्यों पड़े रहे और इस पूरी प्रक्रिया में लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है.
यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां आपस में टकराईं, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर मचा हड़कंप, जानें पूरा मामला