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सड़क पर 4 घंटे तड़पा एंबुलेंस कर्मचारी, 108 नहीं आई:भोपाल में 10 से ज्यादा एंबुलेंस खराब, बदहाल व्यवस्था से परेशान प्रभारी ने दिया इस्तीफा
जिस 108 एंबुलेंस सेवा के भरोसे लोग हादसे के बाद जिंदगी बचने की उम्मीद करते हैं, उसी सेवा के एक कर्मचारी को एक्सीडेंट के बाद चार घंटे तक मदद नहीं मिली। हाथ में फ्रैक्चर था, आंखों पर भी चोट आई थी, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। कर्मचारी ने वीडियो जारी कर अपना दर्द बताया तो व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। मामला सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं है। बल्कि भोपाल सीएमएचओ कार्यलय से मिली जानकारी के अनुसार, रोजाना एंबुलेंस 108 से जुड़ी शिकायतें आ रहीं हैं। इनमें मरीजों को समय पर साहयता नहीं मिलना सबसे प्रमुख है। भोपाल में 42 एंबुलेंस चलाने के दावे के बीच 10 से ज्यादा गाड़ियां खराब होने की जानकारी सामने आई है। अक्टूबर में एंबुलेंस सेवा के भोपाल प्रभारी ने भी व्यवस्थाओं से परेशान होकर इस्तीफा दे दिया था। सड़क पर 4 घंटे तड़पता रहा एंबुलेंस कर्मचारी
108 एंबुलेंस सेवा में इमरजेंसी रिस्पांस ऑफिसर (ईआरओ) के पद पर काम करने वाले अनिल ओंठ के मुताबिक, 17 अक्टूबर को नादरा रोड पर अभिनव हॉल के पास हादसा हुआ। सड़क पर खड़े साइकिल सवार को बचाने के दौरान उनकी बाइक फिसल गई। हादसे में उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया और आंखों पर भी चोट आई। अनिल ने बताया कि उन्होंने तुरंत 108 पर कॉल किया। करीब सात मिनट तक चली बातचीत में उन्होंने अपनी पहचान ईआरओ के रूप में बताई। उनके मुताबिक, शिफ्ट मैनेजर और टीम लीडर ने उन्हें पहचान लिया, लेकिन बताया कि आसपास की एंबुलेंस व्यस्त हैं। उन्हें निजी वाहन करने या 112 से संपर्क करने की सलाह दी गई। आखिरकार चार घंटे बाद उनके दोस्त आए और उन्हें अस्पताल ले गए। कर्मचारी पर शिकायत वापस लेने का दबाव
अनिल ने वीडियो में सवाल उठाया कि जब 108 सेवा के अंदर काम करने वाले कर्मचारी को ही जरूरत के वक्त एंबुलेंस नहीं मिल सकी, तो आम लोगों को कितनी मदद मिलती होगी। उनका आरोप है कि अधिकारी उन पर वीडियो हटाने और शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि वे उनके द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन (NHM) में दर्ज शिकायत वापस नहीं लेंगे, क्योंकि समय पर मदद नहीं मिलने का मामला सिर्फ उनका नहीं, आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है। 10 से ज्यादा खराब, भोपाल प्रभारी ने छोड़ी नौकरी
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, भोपाल में कंपनी 42 एंबुलेंस के संचालन का दावा करती है, लेकिन 10 से ज्यादा गाड़ियां खराबी के कारण इस्तेमाल नहीं हो पा रही हैं। अक्टूबर में भोपाल प्रभारी अवधेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे से पहले उन्होंने 10 एंबुलेंस के मेंटेनेंस की मांग कंपनी के सामने रखी थी। उनका कहना था कि खराब व्यवस्था के कारण संचालन मुश्किल हो रहा था और कई मामलों में मरीजों तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही थी। अवधेश ने कहा कि एंबुलेंस आपातकालीन सेवा है। यदि कंपनी की ओर से गाड़ियों का सही रखरखाव नहीं होगा, तो मरीजों तक समय पर मदद पहुंचाना मुश्किल है। उन्होंने इसी परिस्थिति में काम जारी रखने में असमर्थता जताई। ब्रेक, स्टीयरिंग से लेकर इंजन तक में खराबी
उपलब्ध सूची में खराब गाड़ियों की समस्याएं भी दर्ज हैं। इनमें CG04NZ1427 में ब्रेक की समस्या, CG04NV6405 में ब्रेक और ड्राई सॉफ्ट से जुड़ा काम, CG04NW2553 में स्टीयरिंग की खराबी, CG04NE3601 में क्लच की समस्या, CG04NZ1349 में बेयरिंग की खराबी, CG04NZ1311 में इंजन का काम और MP13AJ6112 में यूरिया पंप की समस्या बताई गई है। ये गाड़ियां खराबी के कारण ऑफ रोड बताई गई हैं। गर्भवती की हालत बिगड़ी, एक घंटे एंबुलेंस नहीं मिली
कर्मचारियों के मुताबिक, समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने का एक अन्य मामला गोविंदपुरा का है। यहां एफसीएम इंजेक्शन देने के बाद गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ गई। उसका ब्लड प्रेशर 50/29 एमएमएचजी तक गिर गया, पल्स 150 से 180 प्रति मिनट रही और ऑक्सीजन का स्तर 85% हो गया। उसे प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन दी गई, लेकिन कर्मचारियों के अनुसार करीब एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली। महिला की गंभीर हालत देखते हुए डॉ. पार्थ, डॉ. संदीप और नर्सिंग ऑफिसर अनुराधा व पूजा उसे निजी वाहन से एम्स लेकर गए। डीएचओ-1 डॉ. दिलीप हलमाडे भी अस्पताल पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महिला की हालत अब स्थिर है और वह डॉक्टरों की निगरानी में है। कंपनी बोली- व्यस्त थी एंबुलेंस 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने कहा कि अनिल से बात की गई है। उनका कहना है कि उन्हें 108 सेवा से कोई शिकायत नहीं है। घटना वाले दिन कई केस होने के कारण एंबुलेंस व्यस्त थीं। अधिकारी बोले- जांच के बाद करेंगे कार्रवाई
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़ी शिकायतें लगातार मिल रही हैं। 10 एंबुलेंस के ऑफ रोड होने की शिकायत भी मिली है। मामले की जांच कराई जा रही है और जल्द कार्रवाई की जाएगी। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के अनुसार, शिकायत प्राप्त हुई है। कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।