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UP Police Bharti 2018 में हाईकोर्ट का फैसला, आरक्षण विवाद में सैकड़ों अभ्यर्थियों की नियुक्ति की उम्मीद जगी, जानें पूरी जानकारी

UP News, (पवन तोमर), प्रयागराज: उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018 के आरक्षण विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की चार विशेष अपीलें खारिज कर दी हैं. अदालत ने अभ्यर्थियों को राहत देने वाले पूर्व आदेशों को बरकरार रखा है. इस फैसले से आरक्षण के तहत चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के कारण चयन से बाहर रह गए सैकड़ों अभ्यर्थियों को राहत मिलने और नियुक्ति की उम्मीद बढ़ी है.
सरकार की चार विशेष अपीलें खारिज
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. विवाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को विभिन्न उपश्रेणियों में समायोजित करने के तरीके से जुड़ा था. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र होने के बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया में उचित लाभ नहीं दिया गया. राज्य सरकार ने पूर्व में दिए गए राहत संबंधी आदेशों को चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसकी चारों विशेष अपीलें खारिज कर दीं.
कटऑफ से अधिक अंक, फिर भी चयन से बाहर
याचिकाकर्ताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थी शामिल थे. उनका कहना था कि ओबीसी महिला, ओबीसी पूर्व सैनिक और स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों जैसी श्रेणियों में उनके दावों पर नियमों के अनुसार विचार नहीं किया गया. अभ्यर्थियों के मुताबिक, उनके अंक संबंधित अनारक्षित महिला, पूर्व सैनिक और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणियों के अंतिम चयनित उम्मीदवारों के कटऑफ से अधिक थे. इसके बावजूद उन्हें चयन सूची में जगह नहीं मिली. इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने अदालत का रुख किया था.
2018 में निकली थी कांस्टेबल भर्ती
उत्तर प्रदेश पुलिस में सिविल पुलिस के 23,520 और पीएसी के 18,000 कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए 14 जनवरी 2018 को विज्ञापन जारी किया गया था. भर्ती की अंतिम चयन सूची 18 फरवरी 2019 को घोषित हुई थी. चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरक्षण के लाभ और विभिन्न श्रेणियों में अभ्यर्थियों के समायोजन को लेकर विवाद सामने आया. इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में अपने साथ हुए कथित अन्याय को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ी.
नियुक्ति से जुड़े वित्तीय लाभ पर भी स्थिति स्पष्ट
मामले में राहत पाने वाले अभ्यर्थियों के वित्तीय लाभ को लेकर भी आदेश में व्यवस्था स्पष्ट की गई है. उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्हें नियुक्ति की तारीख से वित्तीय लाभ दिए जाने की बात कही गई है. हालांकि, पिछली तारीख से वेतन और वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलेगा. इसका अर्थ है कि नियुक्ति मिलने पर अभ्यर्थियों को पिछली अवधि का वेतन या पूर्व प्रभाव से वरिष्ठता दिए जाने का लाभ नहीं होगा. नियुक्ति की वास्तविक प्रक्रिया और समयसीमा संबंधित आदेशों के अनुपालन पर निर्भर करेगी.
एससी-एसटी अभ्यर्थियों ने भी उठाया था मुद्दा
इस विवाद में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कुछ अभ्यर्थियों ने भी राहत की मांग की थी. उनका मामला भी आरक्षण के नियमों और चयन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में समायोजन से संबंधित था. हाईकोर्ट के फैसले के बाद 2018 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती में आरक्षण लागू करने के तरीके पर फिर से ध्यान गया है. अब संबंधित अभ्यर्थियों की निगाहें अदालत के आदेश के अनुपालन और नियुक्ति से जुड़े अगले कदमों पर रहेंगी.
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