Thursday, 29 October 2026
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UP DGP Order: पीड़िता का नाम खोला तो नपेंगे पुलिसकर्मी, UP में डीजीपी के आदेश से अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही, जानें पूरा मामला

INT News29 October 2026 at 09:46 am

UP DGP Order: उत्तर प्रदेश में यौन अपराध के मामलों में पीड़ित महिलाओं और बच्चियों की पहचान उजागर करने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में केवल संबंधित पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है. डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस आयुक्तों और पुलिस कप्तानों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं. आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के एसपी या एसएसपी की भी होगी.

पुराने रिकॉर्ड में भी छिपाना होगा पीड़िता का नाम

डीजीपी ने निर्देश दिया है कि यौन अपराध से जुड़े मामलों में पीड़िता का नाम और पहचान किसी भी हालत में सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए. इसके लिए पुराने दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी और जहां जरूरत होगी, वहां बदलाव किए जाएंगे. पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी रिकॉर्ड, रिपोर्ट या दस्तावेज के जरिए पीड़िता की पहचान सामने न आए. खासकर नाबालिग बच्चियों से जुड़े मामलों में पूरी सावधानी बरतने को कहा गया है.

नाम वाले दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में रखे जाएंगे

जिन सरकारी दस्तावेजों में पहले से पीड़िता का असली नाम दर्ज है, उन्हें अलग करके सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाएगा. सार्वजनिक रिकॉर्ड में असली नाम की जगह ऐसा काल्पनिक नाम या दूसरा शब्द इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पीड़िता की पहचान का पता न चले. ऐसे दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, जिनसे पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा हो. इसका मकसद पीड़ित महिलाओं और बच्चियों की निजता की रक्षा करना है.

ई-साक्ष्य पोर्टल पर एफआईआर से जोड़नी होगी एसआईडी

डीजीपी ने ई-साक्ष्य पोर्टल पर साक्ष्य पहचान संख्या यानी एसआईडी को एफआईआर से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है. जांच अधिकारी को सबसे पहले एसआईडी तैयार करनी होगी और फिर उसे संबंधित प्राथमिकी से लिंक करना होगा. इस व्यवस्था के जरिए मामले से जुड़े साक्ष्यों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी. पुलिस अधिकारियों को इन निर्देशों का सही तरीके से पालन करने और जांच के दौरान पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी

यह निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की नाराजगी के बाद जारी किए गए हैं. उन्नाव के अचलगंज थाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपपत्र में नाबालिग पीड़िता का नाम लिखे जाने पर गंभीर चिंता जताई थी. अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया था कि पीड़िता के छोटे भाई का बयान दर्ज होने के बावजूद उसे गवाह नहीं बनाया गया. इसके बाद कोर्ट ने संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ जांच कराने के निर्देश दिए थे.

पुलिस की कार्यप्रणाली सुधारने पर जोर

हाईकोर्ट ने मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली सुधारने और पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखने को लेकर जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब पुलिस को यौन अपराध से जुड़े मामलों में दस्तावेज तैयार करने से लेकर साक्ष्य दर्ज करने तक सावधानी बरतनी होगी. पीड़िता का नाम सार्वजनिक होने पर संबंधित कर्मचारियों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है.

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