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रोहतक में करीब 400 परिवार का रास्ता बंद:20 फुट की पक्की गली को बताया निजी प्लाट, गेट लगाकर जड़ा ताला
रोहतक के सुखपुरा चौक से जींद बाईपास रोड स्थित छोटू राम नगर की गली नंबर-1 में सार्वजनिक रास्ते को अवैध रूप से बंद करने का मामला तूल पकड़ रहा है। रास्ते पर लोहे का गेट लगाकर ताला जड़ दिया, जिससे करीब 400 परिवारों का रास्ता बंद हो गया है। वहां एक नोटिस भी लगाया गया है, जिसके खिलाफ कॉलोनी के लोग एकजुट हो गए है। छोटूराम नगर निवासी एडवोकेट सुनील शर्मा ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से यहां रहते है। उनके मकानों की रजिस्ट्री में यह रास्ता 20 फीट चौड़ा स्पष्ट दर्ज है। इसके अलावा, नगर निगम द्वारा यहां पक्की सड़क बनाई गई है, पेयजल पाइपलाइन बिछाई गई और बिजली आपूर्ति के लिए ट्रांसफार्मर भी स्थापित किया गया है। ये सभी साक्ष्य सिद्ध करते हैं कि यह पूरी तरह सार्वजनिक गली है। मुनाफे के लिए प्रोपर्टी डीलरों ने गली को बताया प्लॉट
एडवोकेट सुनील शर्मा ने बताया कि जमीन के पुराने मालिकों और कुछ प्रोपर्टी डीलरों ने मुनाफा कमाने के उद्देश्य से बची हुई गली को निजी प्लॉट बताकर फर्जी नोटिस चस्पा कर दिया और लोहे का गेट लगाकर ताला जड़ते हुए रास्ते को बंद कर दिया। जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों व घूमने वाले बुजुर्गों को परेशानी हो रही है। पुल के कारण एक रास्ता खराब, दूसरा किया बंद
स्थानीय नागरिक सतवीर सिंह ने बताया कि जींद बाईपास फ्लाईओवर निर्माण के कारण कॉलोनी का एक मुख्य रास्ता पहले से ही बाधित है। अब एकमात्र सुगम रास्ते पर ताला लग जाने से बच्चों की स्कूल बसें, ऑटो व एम्बुलेंस तक अंदर नहीं आ पा रहे हैं। बारिश के दिनों में खराब और लंबे वैकल्पिक रास्तों पर ऑटो पलटने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। 2016 से गली को लेकर चल रहा विवाद
स्थानीय निवासी चंद्रकला ने बताया कि गली का विवाद वर्ष 2016 से चल रहा है। पहले इसे समय-समय पर खोला जाता था, लेकिन अब इसे स्थाई रूप से बंद कर दिया गया। पुलिस चौकी में शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हो रहा। नगर निगम के एसडीओ व जेई ने मौके का मुआयना किया और आयुक्त ने दस्तावेजों की जांच के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। लोगों ने आंदोलन की दी चेतावनी
कॉलोनी के लोगों ने स्पष्ट किया कि वे कानून और शांति में विश्वास रखते हैं, लेकिन यदि तय समय सीमा के भीतर नगर निगम और जिला प्रशासन ने अवैध रूप से लगाए गेट को हटाकर रास्ता बहाल नहीं कराया, तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को विवश होंगे। इसकी जिम्मेदारी खुद प्रशासन की होगी।