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3 महीने में गड्ढा मुक्त होंगे नेशनल हाईवे, हाईकोर्ट सख्त:याचिका पर सुनवाई के दौरान NHAI ने दिया आश्वासन; कहा-पुलिया और नालियों की भी होगी मरम्मत
नेशनल हाईवे की बदहाल सड़कों, गड्ढों और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियाओं को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। मातृ फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तीन महीने के भीतर सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया। कोर्ट ने एनएचएआई के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई तीन महीने बाद तय की है। सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से एडवोकेट अनिता शर्मा ने कोर्ट को बताया कि नेशनल हाईवे पर मौजूद गड्ढों, उबड़-खाबड़ सड़कों, जाम नालियों, क्षतिग्रस्त पुलियाओं और टूटे पुलों की मरम्मत का काम तीन महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। प्राधिकरण की ओर से दिए गए इस आश्वासन को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया। अब निर्धारित समयसीमा में सड़क और बुनियादी ढांचे की समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी एनएचएआई की होगी। मातृ फाउंडेशन ने जनहित याचिका में उठाया था मुद्दा मातृ फाउंडेशन ने जनहित याचिका के जरिए नेशनल हाईवे की खराब स्थिति और रखरखाव में कथित लापरवाही का मुद्दा उठाया है। याचिका में सड़कों पर गड्ढों के साथ जल निकासी व्यवस्था, पुल-पुलियाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं की बदहाली की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया। सुनवाई में ये रहे उपस्थित मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस अनिल वर्मा की बेंच ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता मातृ फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अमेय बजाज उपस्थित हुए। एनएचएआई की ओर से एडवोकेट अनिता शर्मा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से सरकारी एडवोकेट भुवन गौतम उपस्थित हुए। अब तीन महीने की समयसीमा अहम अब निर्धारित समयसीमा में सड़क और बुनियादी ढांचे की समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी एनएचएआई की होगी। निर्धारित अवधि में सड़क, पुल-पुलियाओं और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का कितना निराकरण होता है, अगली सुनवाई में इस आश्वासन के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।