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सड़क पर उतरा 45 हाथियों का झुंड, फोटो-वीडियो के लिए जान जोखिम में डाल रहे लोग

INT News31 October 2026 at 09:32 pm

नोवामुंडी : हाथियों का झुंड दिखते ही लोग अक्सर उसे देखने और कैमरे में कैद करने के लिए जुट जाते हैं. लेकिन कुछ पल की तस्वीर के लिए उठाया गया जोखिम जानलेवा साबित हो सकता है. नोवामुंडी वन क्षेत्र के लेपांग-भंन गांव मुख्य मार्ग पर शनिवार को करीब 45 हाथियों का झुंड सड़क पार करता दिखाई दिया. हाथियों को देखते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गयी. कई लोग तस्वीरें और वीडियो बनाने में लग गये. स्थिति तब और चिंताजनक हो गयी, जब झुंड के जंगल की ओर निकलने के बाद भी कुछ लोग उसका पीछा करते नजर आये. भीड़ में बच्चे भी मौजूद थे. हाथियों के इतने करीब जाकर फोटो-वीडियो बनाना न केवल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि इससे हाथी भी विचलित हो सकते हैं.

वन विभाग की अपील, हाथियों से बनाकर रखें दूरी

वन विभाग लगातार लोगों को हाथियों के पास नहीं जाने और उनका पीछा नहीं करने की चेतावनी देता रहा है. इसके बावजूद हाथियों को देखने के लिए भीड़ जुटने और फोटो-वीडियो बनाने की प्रवृत्ति पर रोक नहीं लग पा रही है. विभाग ने लोगों से सुरक्षित दूरी बनाये रखने और हाथियों को किसी भी तरह से परेशान नहीं करने की अपील की है. विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के नजदीक जाने, उनका रास्ता रोकने या उनका पीछा करने से स्थिति खतरनाक हो सकती है. ऐसे में हाथियों का झुंड दिखने पर भीड़ लगाने के बजाय सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए.

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खेतों में खड़ी फसल को लेकर किसानों की चिंता

नोवामुंडी वन क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में विचरण कर रहे हाथियों के झुंड से किसानों की चिंता भी बढ़ गयी है. भोजन की तलाश में हाथियों की आवाजाही के कारण खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है. इससे ग्रामीणों के सामने फसल बचाने और खुद को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो जाती है.

आखिर हाथी जाएं तो जाएं कहां?

हाथियों की आवाजाही के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि उनके प्राकृतिक आवास और विचरण मार्ग लगातार सिमटने से मानव-हाथी संघर्ष कैसे कम होगा. झारखंड से ओडिशा और ओडिशा से झारखंड की ओर हाथियों को खदेले जाने की स्थिति में उनके सामने सुरक्षित ठिकाने का संकट और बढ़ सकता है. जंगलों का सिकुड़ना और प्राकृतिक कॉरिडोर बाधित होना इंसानों और हाथियों के बीच टकराव की एक अहम वजह है. ऐसे में केवल हाथियों को एक इलाके से दूसरे इलाके में खदेड़ना स्थायी समाधान नहीं है. उनके प्राकृतिक आवास और पारंपरिक विचरण मार्गों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है, ताकि इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष कम हो सके.

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