समाचार · मध्य प्रदेश
रिटायर्ड बिजली कंपनी कर्मचारी से करीब 70 लाख हड़पे:फर्जी CBI अफसर बनकर पति-पत्नी को 23 दिन घर में डिजिटल अरेस्ट रखा
विदिशा में 70 वर्षीय रिटायर्ड बिजली कंपनी कर्मचारी प्रदीप कपाड़े और उनकी पत्नी के साथ करीब 69.27 लाख रुपए की डिजिटल अरेस्ट की ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने एयरटेल प्रतिनिधि और सीबीआई अफसर बनकर बुजुर्ग दंपती को 23 दिनों तक उनके ही घर में डिजिटल अरेस्ट रखा और रकम हड़प ली। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर 23 लाख रुपए फ्रीज करवा दिए हैं और आरोपियों की तलाश में 5 टीमें गठित की हैं। 5 अक्टूबर 2026 की सुबह प्रदीप कपाड़े के पास एक कॉल आया, जिसमें खुद को एयरटेल प्रतिनिधि बताकर फर्जी सिम चलाने और मुंबई के कोलाबा थाने में एफआईआर दर्ज होने की बात कही गई। इसके बाद फोन थाना प्रभारी को ट्रांसफर किया गया। ठगों ने आधार कार्ड स्कैन करवाकर मामले को ट्राई, सीबीआई जांच और करोड़ों के मनी लॉन्ड्रिंग केस (नरेश गोयल मामला) से जोड़ दिया और जेल भेजने की धमकी दी। 23 दिन तक घर में ही रहे डिजिटल अरेस्ट 5 अक्टूबर 2026 से 28 अक्टूबर 2026 तक दंपती को वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया। रोज सुबह 9:30 बजे कॉल आता था और मोबाइल पर फर्जी अदालत की सुनवाई का नाटक दिखाया जाता था। बुजुर्ग दंपती डर के मारे 23 दिनों तक घर के खिड़की-दरवाजे बंद करके रहे और किसी से बात तक नहीं की। 8 बार में हड़पे 69.27 लाख रुपए आरोपियों ने एफडी तुड़वाकर रकम सेविंग्स अकाउंट में लाने को कहा। 6 अक्टूबर 2026 से 22 अक्टूबर 2026 के बीच 8 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 7 से 8 खातों में कुल 69.27 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। हर बार दो दिन में रकम वापस लौटाने का झूठा भरोसा दिया जाता रहा। बैंक ने होल्ड की रकम तो खुला राज 28 अक्टूबर 2026 को एसबीआई ने संदिग्ध ट्रांजेक्शन देखकर खाते में 16 लाख रुपए होल्ड कर दिए। ठगों के कहने पर जब प्रदीप सिविल लाइन थाने पहुंचे और होल्ड हटवाने की बात कही, तो पुलिस को शक हुआ। कड़ी पूछताछ में 23 दिन की पूरी आपबीती सामने आई। 23 लाख फ्रीज, 5 टीमें गठित विदिशा एसपी रोहित काशवानी के निर्देश पर पुलिस ने आरोपियों के खातों में मौजूद 23 लाख रुपए फ्रीज करा दिए हैं। एडिशनल एसपी मोनिका तिवारी ने बताया कि केस दर्ज कर जांच की जा रही है। उन्होंने अपील की है कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। सीबीआई या पुलिस कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती, ऐसे कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या पुलिस को सूचित करें।