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शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें, सारे कष्ट हो जाएंगे दूर
| जालंधर सावन के पावन माह में भक्तिमय हुआ शहर: शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ शिवालयों में गूंजती ‘ॐ नमः शिवाय’ की पवित्र स्वर-लहरियां, ढोल-नगाड़ों की थाप और जलाभिषेक के लिए तड़के से ही लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें- सावन का पावन महीना शुरू होते ही समूचा शहर भोले बाबा की भक्ति के अलौकिक रंग में रंग गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र त्योहार की तरह है और यह माह भोले बाबा को सबसे ज्यादा प्रिय होता है। इस दौरान किया गया जलाभिषेक जातक के जीवन में सुख-समृद्धि के साथ आरोग्य का वरदान लाता है और खुशियों का आगमन करता है। पंचदेव पूजन का महत्व: किसी भी शुभ काम की शुरुआत पंचदेवों- शिव जी, विष्णु जी, गणेश जी, दुर्गा जी और सूर्य देव की पूजा से होती है। 'श्री गणेश अंक' के अनुसार, विष्णु जी (आकाश तत्व), देवी दुर्गा (अग्नि तत्व), सूर्य देव (वायु तत्व), शिव जी (पृथ्वी तत्व) और गणेश जी (जल तत्व) के स्वामी हैं। इन्हीं पंच तत्वों से हमारा शरीर बना है, इसलिए इनका महत्व अत्यधिक है। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के मुख्य पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि सावन में हर स्टेट का अलग-अलग हिसाब होता है। पंजाब और हिमाचल में संक्रांति के हिसाब से सावन शुरू हो चुका है, जबकि अन्य राज्यों में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक इसे मनाते हैं। गुरु पूर्णिमा के बाद यानी 30 जुलाई से 28 अगस्त तक सावन रहेगा। इस बार सावन में पांच सोमवार होने की वजह से इसे बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि सावन सोमवार पर कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है: पहला सोमवार: 3 अगस्त दूसरा सोमवार: 10 अगस्त तीसरा सोमवार: 17 अगस्त चौथा सोमवार: 24 अगस्त श्रावण मास में सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ने का रस, पंचामृत और सरसों के तेल से अभिषेक कर सकते हैं। इसके साथ ही बेलपत्र, पुष्प हार अर्पित करें और खीर का भोग लगाएं। इस पावन महीने में विधि-विधान से रुद्राक्ष की माला का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। सच्चे मन से भगवान शिव का ध्यान करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है और साधक के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।