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किसान बोले– शिवराज-मोहन की खींचतान में सड़क पर उतरना पड़ा:सवाल–सीएम रहते कोटा बढ़वाते थे शिवराज, कृषि मंत्री बने तो इस बार क्यों नहीं?
मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इसी प्रदेश से हैं। इसके बावजूद मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग को लेकर किसानों को तीन दिन आंदोलन करना पड़ा। राज्य ने केंद्र से खरीदी का कोटा 4.54 लाख से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद राज्य सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60% मूंग खरीदने का फैसला किया। अब किसान सवाल उठा रहे हैं-जब केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है, तो खरीदी का कोटा क्यों नहीं बढ़ा? किसान संगठन इसके पीछे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच कथित खींचतान को वजह बता रहे हैं। हालांकि केंद्र का कहना है कि नियमों के तहत मध्य प्रदेश को पहले ही देश में सबसे ज्यादा मूंग खरीदी की मंजूरी दी गई है। पहले भी गतिरोध हुआ, इस बार कोटा क्यों नहीं बढ़ा? किसान स्वराज संगठन के जिला अध्यक्ष भगवान सिंह यदुवंशी कहते हैं, “मूंग खरीदी को लेकर पहले भी गतिरोध हुआ है। तब हम शिवराज सिंह चौहान से मांग करते थे और राज्य सरकार केंद्र से बात कर खरीदी का कोटा बढ़वा लेती थी। इस बार मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से मांग के बावजूद कोटा नहीं बढ़ा। हमारा सवाल है कि खरीदी 25% तक ही क्यों सीमित की गई? बाकी उपज हमें खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ती।” यदुवंशी सवाल उठाते हैं, “शिवराज सिंह चौहान खुद को ‘मामा’ कहते हैं और जानते हैं कि उनके क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मूंग होती है। इसके बावजूद किसानों के हित में फैसला क्यों नहीं हुआ?” उनका आरोप है कि शिवराज और मोहन यादव के बीच राजनीतिक रस्साकशी का असर किसानों पर पड़ रहा है। ‘नेताओं की आपसी लड़ाई में किसानों को न घसीटें’ भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव का आरोप है कि शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव के बीच राजनीतिक मतभेद का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। वे कहते हैं, “दोनों नेताओं की आपसी लड़ाई में किसानों को नहीं घसीटना चाहिए।” अनिल यादव कहते हैं, “केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी का असर किसानों पर पड़ रहा है। सवाल है कि केंद्रीय कृषि मंत्री जिस प्रदेश से आते हैं, वहीं के किसानों को मूंग खरीदी के लिए इतना आंदोलन क्यों करना पड़ा? इसका जवाब शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव दोनों को देना चाहिए।” अब समझिए, किसानों का गुस्सा क्यों फूटा? मूंग का समर्थन मूल्य ₹8,768 प्रति क्विंटल है। पिछले साल प्रति हेक्टेयर यानी करीब ढाई एकड़ में 12 क्विंटल उत्पादन को आधार मानकर खरीदी हुई थी। इस बार शुरुआत में एक एकड़ पर सिर्फ 1.20 क्विंटल मूंग समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी। बाकी उपज किसानों को खुले बाजार में बेचनी पड़ती, जहां उन्हें करीब ₹5,500 प्रति क्विंटल भाव मिल रहा था। इसे उदाहरण से समझिए। एक एकड़ में 5 क्विंटल मूंग पैदा हुई तो 1.20 क्विंटल सरकार ₹8,768 प्रति क्विंटल पर खरीदती और बाकी 3.80 क्विंटल खुले बाजार में करीब ₹5,500 के भाव बिकती। पूरी उपज MSP पर बिकने की तुलना में किसान को करीब ₹12,418 प्रति एकड़ कम आय होती। 10 एकड़ में यह अंतर करीब ₹1.24 लाख होता। शिवराज का पत्र: केंद्र अधिकतम 25% उत्पादन खरीद सकता है गतिरोध के बीच प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश का मूंग खरीदी कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की। जवाब में शिवराज ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को बताया कि पीएम-आशा योजना के तहत केंद्र अधिकतम 25% उत्पादन समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश के लिए 4,54,580 मीट्रिक टन खरीदी मंजूर हुई है। देशभर के लिए मंजूर 5,23,243 मीट्रिक टन में से करीब 87% हिस्सा मध्यप्रदेश का है, जो किसी भी राज्य में सबसे अधिक है। 60% खरीदी के फैसले से किसानों को कितनी राहत? किसान संगठनों से बातचीत के बाद मंत्री समूह ने पात्र किसानों से मूंग उपज की खरीदी 25% से बढ़ाकर 60% करने का फैसला किया। नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में यह करीब 3 क्विंटल प्रति एकड़ बैठता है। फैसला लागू होने के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म कर दिया। यदि एक एकड़ में 5 क्विंटल पैदावार हो तो अब 3 क्विंटल मूंग MSP पर खरीदी जाएगी। पुराने 1.20 क्विंटल के मुकाबले 1.80 क्विंटल अतिरिक्त उपज MSP पर बिक सकेगी। ₹8,768 MSP और ₹5,500 बाजार भाव के अंतर के आधार पर इससे करीब ₹5,882 प्रति एकड़ अतिरिक्त आय होगी। 5 एकड़ में यह अंतर करीब ₹29,400 होगा। 60% मूंग खरीदी पर ₹6,625 करोड़ ज्यादा खर्च करेगी सरकार मूंग खरीदी की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% करने से सरकार को करीब ₹6,625 करोड़ अतिरिक्त भुगतान करना होगा। पहले 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने पर करीब ₹3,981 करोड़ खर्च होने थे। अब 12.096 लाख मीट्रिक टन खरीदी पर करीब ₹10,606 करोड़ का भुगतान करना होगा। यानी किसानों के खातों में पहले के मुकाबले करीब ₹6,625 करोड़ ज्यादा जाएंगे। प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने कहा, “मध्यप्रदेश सरकार हमेशा किसानों के हित में काम करती आई है। अन्नदाता प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार हैं।''