national
दुनिया के लिए खतरा बना अल नीनो-ग्लोबल वॉर्मिंग का कॉम्बिनेशन, 30 डिग्री पहुंचा महासागरों का तापमान

Cyclone Arnab El Nino And Global Warming Explained: अल नीनो के कारण सितंबर 2026 में दुनिया भर में रिकॉर्ड 19 ट्रॉपिकल स्टॉर्म बने. इससे एशिया, अफ्रीका, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में लोगों को तबाही झेलनी पड़ी. पूर्वी प्रशांत महासागर में बना ‘हरिकेन पोलो’ रिकॉर्ड तेजी से श्रेणी-5 का महातूफान बन गया. वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव ने ऐसे तूफान के बनने की संभावना को 14 गुना तक बढ़ा दिया. अब भारत में शक्तिशाली ‘चक्रवात अर्नब’ ने दस्तक दी है, जिसमें कम से कम 3 लोगों की मौत हो गयी. 55 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना पड़ा. आईए, जानते हैं, कैसे दुनिया के लिए खतरा बन रहा अल नीनो और ग्लोबल वॉर्मिंग का गठजोड़. किस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया महासागरों का तापमान.
समुद्र की सतह का तापमान 1.10 डिग्री बढ़ा
मौसम वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अल नीनो (El Nino) और ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) के कॉम्बिनेशन की वजह से मानसूनी और समुद्री तूफानों के पैटर्न बदल गये हैं. यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने नये वैश्विक आंकड़े जारी कर कहा है कि सितंबर 2026 में समुद्र की सतह का औसत तापमान (Sea Surface Temperature) सामान्य से +1.10 डिग्री सेंटीग्रेड (+1.98 डिग्री फारेनहाइट) अधिक रहा. यह अब तक के इतिहास का उच्चतम तापमान है. इस अभूतपूर्व समुद्री गर्मी और ‘अल नीनो’ के कारण उत्तर हिंद महासागर (North Indian Ocean) और प्रशांत महासागर में चक्रवात तेजी से ताकतवर होने (Rapid Intensification) लगे हैं.
गर्म होते वायुमंडल और महासागरीय जल ने उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) तूफान को तेजी से तीव्र होने (रैपिड इंटेंसिफिकेशन) में मदद की. सामान्य से अधिक गर्म समुद्री सतह के तापमान और अल नीनो परिस्थितियों के संभावित प्रभाव ने इसकी तीव्रता में योगदान दिया होगा. हालांकि, ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण अल नीनो उत्पन्न नहीं होता है, लेकिन पृष्ठभूमि में हो रही वॉर्मिंग अतिरिक्त गर्मी को बढ़ाती है. गर्म महासागर के पानी तूफान को तीव्र बनाने के लिए जरूरी गर्मी और नमी की आपूर्ति कर रहे हैं. -डॉ केजे रमेश, पूर्व महानिदेशक, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
ये भी पढ़ें: आंध्र तट से टकराने के बाद कमजोर पड़ा 'अर्नब', 3 लोगों की मौत; 55 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित निकाले गए
उत्तर हिंद महासागर में 38 प्रतिशत तूफान 24 घंटे में ले रहे विकराल रूप
वैज्ञानिक अध्ययनों और NOAA डेटा के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि महासागरों द्वारा अवशोषित की जा रही 93 प्रतिशत अतिरिक्त गर्मी तूफानों के लिए असीमित ऊर्जा का स्रोत (Energy Source) बन गयीं हैं. प्रशांत महासागर के साथ-साथ हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का तापमान 22 अक्टूबर के बाद से लगातार 30 डिग्री सेंटीग्रेड या उससे अधिक बना हुआ है. यह चक्रवात बनने के लिए अत्यधिक अनुकूल परिस्थिति है. अटलांटिक सागर, हिंद महासागर और दक्षिणी महासागर तक के तापमान भी सामान्य से अधिक हो गये हैं. अन्य महासागरों का तापमान भी बहुत कम नहीं है.
तेजी से ताकतवर होने लगे हैं चक्रवात
वर्ष 2000 के बाद से उत्तर हिंद महासागर में 38 प्रतिशत चक्रवात ‘रैपिड इंटेंसिफाई’ हो रहे हैं यानी केवल 24 घंटे में 50 नॉट्स या 93 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक ताकतवर हो जा रहे हैं. तुलनात्मक रूप से यह दर उत्तर-पश्चिम प्रशांत महासागर से 22 प्रतिशत अधिक है.
ये भी पढ़ें: Cyclone Arnab School Holiday 2026: चक्रवात का असर, झारखंड और ओडिशा में कल तक स्कूल बंद, जानें अपडेट
बंगाल की खाड़ी में पूर्व की ओर खिसका चक्रवात बनने का स्थान
बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने का स्थान (Cyclogenesis Location) पूर्व की ओर खिसक गया है. इसके कारण चक्रवात समुद्र के ऊपर लंबे समय तक यात्रा करते हैं. गर्म जल की सतह से थर्मल एनर्जी (Thermal Energy) को सोखकर अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclone) में तब्दील हो जाते हैं.
बंगाल की खाड़ी में वर्तमान परिस्थितियां चक्रवात बनने (साइकलोजेनेसिस) के लिए बेहद अनुकूल हैं. चक्रवात अर्नब के प्रभावों को बढ़ाने में अल नीनो महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. समुद्र का तापमान पहले से ही सामान्य से अधिक है. गर्म वायुमंडल के कारण नमी की मात्रा बढ़ती है, जिससे घने काले बादल बनते हैं. अत्यधिक बारिश होती है. हमें आने वाले दिनों में और तेज वर्षा की उम्मीद करनी चाहिए. -अक्षय देवरस, शोध वैज्ञानिक, नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस, यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, यूनाइटेड किंगडम
‘चक्रवात अर्नब’ से आंध्रप्रदेश में 3 की मौत
‘चक्रवात अर्नब’ इसी तीव्र समुद्री गर्मी का परिणाम है. आंध्रप्रदेश और यानम के तट से टकराने के बाद मची तबाही में 3 लोगों की मौत हो गयी और 55 हजार लोग प्रभावित हुए. 24 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन बनने के मात्र 36 घंटे के भीतर ‘चक्रवात अर्नब’ ने अत्यंत भीषण रूप धारण कर लिया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 अक्टूबर को इसे बहुत गंभीर साइक्लोनिक स्टोर्म (Very Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी में अपग्रेड किया था.
ये भी पढ़ें: अर्नब की चेतावनी के बीच मंदारमणि में बड़ा हादसा, समुद्र में 3 पर्यटक डूबे, 1 की मौत, कोलकाता में बारिश
125-135 किमी की रफ्तार से टकराया ‘अर्नब’
अर्नब चक्रवात 28 अक्टूबर 2026 की तड़के आंध्रप्रदेश और यानम (Yanam) तट से 125-135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराया. इसके हवा के झोंके 150 किमी प्रति घंटे (150 kmph) तक पहुंचे. इसके असर से 3 लोगों की मौत हो गयी. 55 हजार लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा. खतरा अभी टला नहीं है. अर्नब चक्रवात का असर 31 अक्टूबर तक देखने को मिलेगा.
हर साल चक्रवात झेल रहा आंध्रप्रदेश, खतरे में 33 लाख आबादी
आंध्रप्रदेश में 29 से 33 लाख की आबादी समुद्र तट के 5 किलोमीटर के दायरे में रहती है. वर्ष 1975 से वर्ष 2026 के बीच आंध्रप्रदेश ने 60 से अधिक छोटे-बड़े तूफानों का सामना किया है. वर्ष 1891 से वर्ष 2019 के बीच आंध्र के तट से हर तरह के 184 चक्रवात गुजरे हैं. पिछले 40 वर्षों में ऐसा एक भी वर्ष नहीं बीता, जब आंध्रप्रदेश ने तूफान, बाढ़ या भारी बारिश का सामना न किया हो.
ये भी पढ़ें: चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का बिहार में असर शुरू, 13 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, जानिए अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम
सितंबर 2026 में 19 तूफान आये, दुनिया भर में मची तबाही
अल नीनो 2026 के कारण सितंबर 2026 में दुनिया भर में रिकॉर्ड 19 ट्रॉपिकल स्टॉर्म बने. पूर्वी प्रशांत महासागर में बना ‘हरिकेन पोलो’ रिकॉर्ड तेजी से विकसित होकर श्रेणी 5 का महातूफान बना. वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव ने ऐसे तूफान के बनने की संभावना को 14 गुना बढ़ा दिया.
टाइफून ‘डुजुआन’ (Dujuan) और ‘साउदेल’ (Saudel) की वजह से एशियाई देशों जापान और चीन में मूसलाधार बारिश हुई. बाढ़ और भू-स्खलन से तबाही मची.
सितंबर में इन क्षेत्रों में रिकॉर्ड गर्मी
सितंबर 2026 इतिहास का दूसरा सबसे गर्म महीना रहा. जिन इलाकों में रिकॉर्ड गर्मी पड़ी, उनमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका और एशिया शामिल हैं.
विशेषज्ञ बोले- क्लाइमेट-प्रूफ इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के प्रमुख डॉ कृष्ण एस वत्स और IPCC रिपोर्ट के लेखक प्रो अंजल प्रकाश कहते हैं कि आधुनिक मौसम पूर्वानुमानों और पूर्व तैयारियों से जान-माल का नुकसान (Mortality) तो काफी कम हुआ है, लेकिन आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है. चक्रवात अब केवल तटीय इलाकों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राज्यों के भीतरी हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसलिए क्लाइमेट-प्रूफ इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत है.
एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि चक्रवात के बाद आने वाली बाढ़, बिजली आपूर्ति ठप होना या परिवहन बाधित होना जैसी कंपाउंडेड रिस्क (अनुक्रमिक तबाही) सबसे बड़ा ब्लाइंड स्पॉट हैं. अनौपचारिक मजदूरों, छोटे व्यापारियों और किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए क्लाइमेट रिस्क मैपिंग के आधार पर फ्लड-प्रूफ सड़कें, मजबूत पावर ग्रिड, लचीले आवास और एडवांस बीमा मॉडल तैयार करने होंगे.
अर्नब चक्रवात : डिप्रेशन से लैंडफॉल की जर्नी
24 अक्टूबर को उठा डिप्रेशन, 36 घंटे में लिया विकराल रूप.
24 अक्टूबर: बंगाल की खाड़ी में एक ट्रॉपिकल डिप्रेशन विकसित हुआ.
36 घंटे के भीतर अभूतपूर्व तेजी से मजबूत होकर चक्रवाती तूफान का रूप लिया.
26 अक्टूबर को मौसम विभाग ने तेजी से चक्रवात के तीव्र होने (Rapid Intensification) को देखते हुए इसे 'अत्यंत भीषण' (Very Severe) श्रेणी में अपग्रेड किया.
28 अक्टूबर को नरसीपुर (Narsapur), यानम (Yanam), काकीनाडा (Kakinada), मछलीपट्टनम (Machilipatnam), तुनी (Tuni) और गन्नवरम (Gannavaram) के तटीय बेल्ट से टकराकर तबाही मचायी.