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3 मिनट 47 सेकंड में 50 राग गाकर जमशेदपुर के आशुतोष ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया नाम, ऑटिज्म भी नहीं बना बाधा

जमशेदपुर : महज 3 मिनट 47 सेकंड और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के 50 राग. सुनने में भले ही हैरान करने वाला लगे, लेकिन जमशेदपुर के 20 वर्षीय आशुतोष पाणिग्रही ने यह कारनामा कर दिखाया है. सुंदरनगर निवासी आशुतोष ने महज 227 सेकंड में 50 राग गाकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. खास बात यह है कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) से प्रभावित आशुतोष इससे पहले गणित में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं. वर्ष 2023 में उन्होंने महज 15 मिनट में जोड़ और गुणा के 208 सवालों के सही जवाब देकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाई थी. अब संगीत में एशियाई स्तर पर मिली सफलता ने उनकी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया है.
तीन साल तक किया रियाज, अब एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम
आशुतोष की इस उपलब्धि के पीछे तीन वर्षों की मेहनत और नियमित रियाज है. उनके संगीत शिक्षक पवन कुमार चौबे ने इस सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त पवन कुमार चौबे पिछले तीन वर्षों से आशुतोष को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण दे रहे हैं. इस दौरान आशुतोष ने न केवल संगीत के सुरों को साधा, बल्कि अलग-अलग रागों की बारीकियों को भी समझा. नियमित अभ्यास और शिक्षक के मार्गदर्शन का परिणाम है कि उन्होंने महज 3 मिनट 47 सेकंड में 50 राग प्रस्तुत कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान हासिल किया.
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गणित में भी कमाल, 15 मिनट में हल किए थे 208 सवाल
आशुतोष की प्रतिभा सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं है. गणित में भी वह अपनी असाधारण क्षमता दिखा चुके हैं. वर्ष 2023 में उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की चुनौती में महज 15 मिनट के भीतर जोड़ और गुणा के कुल 208 सवालों के सही जवाब दिए थे. इनमें जोड़ के 101 और गुणा के 107 सवाल शामिल थे. गणित में राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड बनाने के बाद अब संगीत में एशियाई स्तर पर पहचान हासिल करना आशुतोष के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है.
मां बोलीं- बेटे की मेहनत और शिक्षक के मार्गदर्शन से मिली सफलता
आशुतोष की मां डॉ. निवेदिता बेटे की उपलब्धि से बेहद खुश हैं. उन्होंने इस सफलता का श्रेय आशुतोष की मेहनत और संगीत शिक्षक पवन कुमार चौबे के मार्गदर्शन को दिया है. डॉ. निवेदिता के अनुसार, लगातार तीन वर्षों तक संगीत का प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास आशुतोष की सफलता का आधार बना. परिवार ने हमेशा उनकी रुचियों को समझते हुए आगे बढ़ने के अवसर दिए हैं. आशुतोष वर्तमान में संगीत के साथ कंप्यूटर का भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. परिवार का प्रयास है कि वह अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ें और भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें.
संगीत और गणित ही नहीं, पावरलिफ्टिंग में भी जीत चुके हैं पदक
आशुतोष की उपलब्धियों की सूची यहीं समाप्त नहीं होती. संगीत और गणित के अलावा उन्हें खेलों में भी दिलचस्पी है. विशेष रूप से पावरलिफ्टिंग उनका पसंदीदा खेल है. इस खेल में भी वह पदक हासिल कर चुके हैं. एक ओर संगीत में रागों पर पकड़, दूसरी ओर गणित में तेज गणना और खेलों में पदक हासिल करना उनकी विविध प्रतिभाओं को दर्शाता है.
संगीत शिक्षक बनने का है सपना, अबेकस चैंपियन बनने का भी लक्ष्य
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने के बाद आशुतोष की नजर अब अपने अगले लक्ष्य पर है. वह भविष्य में संगीत शिक्षक बनना चाहते हैं. उनकी इच्छा है कि जिस संगीत ने उन्हें पहचान दिलाई, उसकी शिक्षा वह दूसरे लोगों को भी दें. इसके साथ ही आशुतोष अबेकस के क्षेत्र में भी चैंपियन बनने का सपना देख रहे हैं. वह अपनी संगीत शिक्षा जारी रखने के साथ कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर रहे हैं.
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ऑटिज्म को अपनी पहचान की सीमा नहीं बनने दिया
आशुतोष ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) से प्रभावित हैं. यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के संवाद, सामाजिक संपर्क और व्यवहार के तरीके अलग हो सकते हैं. प्रत्येक ऑटिस्टिक व्यक्ति की क्षमताएं और जरूरतें अलग-अलग होती हैं. संगीत शिक्षक पवन कुमार चौबे का मानना है कि व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास और परिवार का सहयोग विशेष जरूरतों वाले बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने में मदद कर सकता है. आशुतोष की उपलब्धियां भी यही दर्शाती हैं कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी स्थिति तक सीमित नहीं होती. संगीत, गणित और खेलों में मिली सफलता के साथ जमशेदपुर के इस युवा ने अपनी अलग पहचान बनाई है.