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31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे बृहस्पति:शनि से बनेगा दृष्टि संबंध; 12 राशियों पर असर पड़ेगा
शनिवार (31 अक्टूबर) को बृहस्पति ग्रह कर्क राशि छोड़कर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। पंचांग की गणना के अनुसार, नवग्रहों में गुरु का स्थान प्राप्त बृहस्पति के राशि परिवर्तन से सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और प्राकृतिक क्षेत्रों में अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिंह राशि में प्रवेश के बाद बृहस्पति का केतु के साथ युति संबंध बनेगा। इससे शोध, शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में विकास तथा नवाचार की संभावनाएं बनेंगी। बृहस्पति के राशि परिवर्तन से आर्थिक नीतियों पर प्रभाव की संभावना ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बावाला ने बताया कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को बैंकिंग, ब्याज, विकास, सोना, अनाज और प्रभावशाली व्यक्तित्व का कारक माना जाता है। बृहस्पति का सिंह राशि में प्रवेश विशेष ज्योतिषीय घटना मानी जा रही है। उनके अनुसार, इस दौरान भारतीय राजनीति के साथ धर्म, अध्यात्म और संस्कृति से जुड़े क्षेत्रों में भी परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। बृहस्पति इस समय अपनी सामान्य गति से अधिक तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में इस स्थिति को 'अतिचार' कहा जाता है। पंडित डिब्बावाला के मुताबिक, बृहस्पति की अतिचारी गति का प्रभाव भारतीय राजनीति के साथ विश्व के राजनीतिक परिदृश्य पर भी दिखाई दे सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में औद्योगिक नीतियों, विकास के मॉडल और बैंकिंग सेक्टर में भी बदलाव के संकेत हैं। बृहस्पति-शनि का बनेगा दृष्टि संबंध, मौसम में बदलाव के संकेत बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के बाद शनि से दृष्टि संबंध बनेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, दोनों ग्रहों के बीच षडाष्टक संबंध बनने की स्थिति रहेगी। पंडित डिब्बावाला के अनुसार, यह ग्रह स्थिति दिसंबर और जनवरी में प्राकृतिक आपदाओं के संकेत दे रही है। इस दौरान मौसम और जलवायु में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व और पश्चिम दिशा से जुड़े देशों में मौसमी बदलाव के साथ तूफान, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका ज्योतिषीय गणना में जताई जा रही है। बृहस्पति और केतु की बनेगी युति वर्तमान में केतु सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं। बृहस्पति के इसी राशि में प्रवेश करने से दोनों ग्रहों का युति संबंध बनेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, यह युति वैज्ञानिक शोध, शैक्षणिक संशोधन और नए प्रयोगों के लिए अनुकूल संकेत दे रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में दिखाई दे सकता है।