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नौकरी मांगने सड़क पर उतरे छात्रों पर कार्रवाई की तैयारी:शिक्षा मंत्री के जिले में बिना अनुमति किया प्रदर्शन, अगले दिन SDM का नोटिस: 50-50 हजार के बंधपत्र पर मांगा जवाब, 18 अगस्त को पेशी
दुर्ग में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर आवाज उठाने वाले बेरोजगार छात्रों के उपर बाउंड ओवर की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एक तरफ आगामी शिक्षक भर्ती में कई विषयों के छात्रों को मौका मिलने पर सवाल खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने के बाद नेतृत्व करने वाले छात्रों पर SDM कोर्ट की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की तैयारी है। करीब 5 छात्रों को नोटिस भेजकर 18 अगस्त को SDM के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया है। इन छात्रों से 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 50-50 हजार रुपए की प्रतिभूति वाले बंधपत्र को लेकर जवाब मांगा गया है। छात्रों का कहना है कि वे नौकरी मांगने के लिए सड़क पर उतरे थे। उनके सामने पहले ही रोजगार का संकट है। अब प्रदर्शन के बाद बाउंड ओवर की कार्रवाई से उन पर एक और दबाव बन गया है। छात्रों का सवाल है कि जब सरकार से भर्ती में अवसर देने की मांग करना ही उनका मुद्दा है, तो अपनी बात रखने के बाद उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है। छात्र ऐसे में अपनी मांग उठाने वालों की आवाज को दबा रही है। शिक्षा मंत्री के जिले में अपनी मांग को रखने पर छात्रों को डराया जा रहा है। प्रदर्शन के अगले ही दिन SDM कोर्ट की कार्रवाई
अपनी मांगों को लेकर विद्यार्थियों ने 13 अगस्त को प्रदर्शन किया था। SDM के 14 अगस्त के आदेश के मुताबिक पुलिस ने BNSS की धारा 126 से 135(3) के तहत मामला SDM कोर्ट भेजा। पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया कि 13 अगस्त को हिंदी भवन के सामने मेन रोड पर बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया गया, जिससे आवागमन में परेशानी हुई। इसी रिपोर्ट के आधार पर SDM ने BNSS की धारा 130 के तहत प्रारंभिक आदेश जारी किया। आदेश में 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपए की प्रतिभूति वाले बंधपत्र को लेकर जवाब मांगा गया है। नेतृत्व करने वाले करीब 5 छात्रों को 18 अगस्त को SDM के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया है। छात्रों का सवाल- रोजगार मांगने पर कार्रवाई क्यों?
छात्रों का कहना है कि वे पहले ही बेरोजगारी से परेशान हैं। सरकार से शिक्षक भर्ती की मांग करना उनका अधिकार है। एक तरफ भर्ती में पद कम होने और परीक्षा में मौका नहीं मिलने की चिंता है, दूसरी तरफ प्रदर्शन के बाद बाउंड ओवर की कार्रवाई सामने आ गई है। ऐसे में छात्रों के सामने आर्थिक और मानसिक दबाव दोनों बढ़ गए हैं। 13 अगस्त को हिंदी भवन के सामने किया था प्रदर्शन
13 अगस्त को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र दुर्ग पहुंचे थे। हिंदी भवन के सामने मेन रोड पर शिक्षक भर्ती और CTET से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। छात्रों की सबसे बड़ी मांग आगामी शिक्षक भर्ती में विज्ञान शिक्षक, जीव विज्ञान व्याख्याता, रसायन व्याख्याता और गणित व्याख्याता के पद शामिल करने की है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने इन विषयों से पढ़ाई की है और लंबे समय से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। अगर भर्ती में इन विषयों के पद नहीं निकले तो पढ़ाई और तैयारी में लगाए सालों के बाद भी उन्हें नौकरी के लिए आवेदन करने का मौका नहीं मिलेगा। CTET देने वाले छात्रों को भी मौका देने की मांग
छात्रों ने 6 सितंबर 2026 को होने वाली CTET परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जो छात्र 6 सितंबर को CTET की परीक्षा देंगे, उन्हें भी आगामी शिक्षक भर्ती में आवेदन करने का मौका मिलना चाहिए। भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा की तारीख को देखते हुए उन्हें बाहर करना कई छात्रों के लिए बड़ा नुकसान होगा। इसके अलावा स्नातक में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता में सभी को 5 प्रतिशत छूट देने और स्वामी आत्मानंद स्कूलों की भर्ती में हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम के योग्य छात्रों को मौका देने की मांग भी की गई थी। शिक्षा मंत्री के गृह जिले में उठी आवाज
जिस दुर्ग में छात्रों ने प्रदर्शन किया, वह प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला है। छात्रों ने यहां पहुंचकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्री से भी छात्रों की मांगों को लेकर सवाल किया गया था, लेकिन छात्रों के मुताबिक उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। छात्रों का कहना है कि सरकार को बेरोजगार युवाओं की परेशानी समझनी चाहिए। वे किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य और रोजगार के लिए आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में मांगों पर बातचीत करने के बजाय बाउंड ओवर की कार्रवाई शुरू होने से छात्रों में नाराजगी है। जानिए क्या है बाउंड ओवर की कार्रवाई?
बाउंड ओवर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाने वाली प्रतिबंधात्मक कार्रवाई है। जब पुलिस को किसी व्यक्ति से शांति भंग होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होती है, तो मामला SDM कोर्ट भेजा जा सकता है। SDM BNSS की धारा 130 के तहत प्रारंभिक आदेश जारी कर संबंधित व्यक्ति से जवाब मांगते हैं। इसके बाद सुनवाई में बंधपत्र की शर्त तय हो सकती है। यह सजा या FIR नहीं होती। बंधपत्र की राशि सीधे जुर्माना नहीं है, बल्कि तय अवधि तक शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी से जुड़ी होती है। दुर्ग मामले में 6 महीने के लिए ₹50 हजार की प्रतिभूति वाले बंधपत्र पर जवाब मांगा गया है। SDM आदेश में क्या कहा गया
SDM के 14 अगस्त के आदेश के अनुसार पुलिस ने BNSS की धारा 126 से 135(3) के तहत प्रकरण भेजा था। पुलिस रिपोर्ट में 13 अगस्त को हिंदी भवन के सामने मेन रोड पर बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन करने और आवागमन में व्यवधान होने की बात कही गई है। इसके आधार पर SDM ने BNSS की धारा 130 के तहत प्रारंभिक आदेश जारी किया। नेतृत्व करने वाले छात्रों से 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपए की प्रतिभूति वाले बंधपत्र को लेकर जवाब मांगा गया है। उन्हें 18 अगस्त को SDM कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।