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शाजापुर जिला अस्पताल में पेपरलेस इलाज का ट्रायल शुरू:पहले दिन 15 मरीजों का ऑनलाइन जांच; दवाइयों की जानकारी भी ऑनलाइन पहुंचेगी
शाजापुर जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज और मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल करने की दिशा में शनिवार से नई व्यवस्था शुरू की गई। अस्पताल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत जनरल मेडिसिन विभाग को चुना गया है। पहले दिन ऑनलाइन व्यवस्था से 15 मरीजों का पेपरलेस उपचार किया गया। मरीजों की दवाइयों और लैब जांच की पर्चियां भी ऑनलाइन सिस्टम के जरिए संबंधित विभागों तक भेजी गईं। ऑनलाइन होगा मरीज का पूरा रिकॉर्ड नई व्यवस्था के तहत मरीज का पंजीयन ऑनलाइन किया जाएगा और उसे टोकन मिलेगा। इसके बाद नर्सिंग स्टाफ बीपी समेत जरूरी प्राथमिक जांच करेगा। डॉक्टर कंप्यूटर सिस्टम पर मरीज की जानकारी देखकर उपचार तय करेंगे। डॉक्टर द्वारा ऑनलाइन दर्ज की गई जांच की जानकारी सीधे संबंधित लैब तक पहुंचेगी। इससे मरीज को जांच की पर्ची लेकर लैब जाने की जरूरत नहीं होगी। दवाइयों से संबंधित जानकारी भी डिजिटल रूप से दर्ज रहेगी। डॉक्टरों और कर्मचारियों की आईडी तैयार पायलट प्रोजेक्ट के लिए डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट और लैब तकनीशियनों की ऑनलाइन आईडी तैयार की गई है। एडमिन के रूप में सिविल सर्जन डॉ. बीएस मैना की आईडी बनाई गई है। रजिस्ट्रेशन के लिए अरुण वर्मा और संतोष चौहान, ओपीडी वायटल के लिए दशरथ धाकड़ और कनीराम तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों के रूप में डॉ. आलोक सक्सेना और डॉ. जेपी शर्मा की आईडी तैयार की गई है। आईपीडी नर्सिंग के लिए प्रीति कवरेती और रेखा डाबी, फार्मासिस्ट विभाग के लिए शुभि जोशी और चित्रासिंह, रेडियोलॉजी के लिए प्रीति चौहान और वंदना बर्मन तथा पैथालॉजी के लिए मोहनलाल पाटीदार और राहुल सेंधव की आईडी बनाई गई है। नवंबर-दिसंबर तक चलेगा पायलट सिविल सर्जन डॉ. बीएस मैना और प्रभारी आरएमओ डॉ. दीपक पाटीदार ने बताया कि फिलहाल जनरल मेडिसिन विभाग में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर व्यवस्था की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुविधा का आकलन किया जाएगा। इसे नवंबर-दिसंबर तक चलाने के बाद ट्रायल के परिणामों के आधार पर अन्य विभागों में लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। इस व्यवस्था से मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। भविष्य में डॉक्टर मरीज की पुरानी बीमारी, उपचार और जांच संबंधी जानकारी ऑनलाइन देखकर इलाज तय कर सकेंगे।