Friday, 23 October 2026
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जाखल में किसानों ने रेल ट्रैक पर बैठकर रोकीं ट्रेनें:अस्थायी रास्ता खोलने की मांग; इंटरसिटी आधे घंटे और पैसेंजर 45 मिनट खड़ी रही

INT News23 October 2026 at 05:50 pm

फतेहाबाद जिले के जाखल रेलवे स्टेशन पर अस्थायी रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर किसानों ने शुक्रवार शाम रेल ट्रैक पर पहुंचकर दो ट्रेनों को रोक दिया। रास्ता खोलने का समाधान नहीं निकलने पर किसानों ने दिल्ली-श्रीगंगानगर इंटरसिटी एक्सप्रेस को करीब 30 मिनट और हिसार-लुधियाना पैसेंजर ट्रेन को 45 मिनट तक रोके रखा। सूचना मिलने पर टोहाना के डीएसपी जयभगवान मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की। अधिकारियों से समस्या के समाधान का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने दोनों ट्रेनों को रवाना होने दिया। हालांकि, रास्ता खोलने की मांग पर किसानों का आंदोलन जारी है और वे रेल ट्रैक पर बैठे हैं। किसानों ने दिल्ली से श्रीगंगानगर जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस और हिसार से लुधियाना जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को जाखल स्टेशन पर रोककर अपना विरोध जताया। 15 सदस्यीय कमेटी ने रखी मांग जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे से किसान संगठनों की 15 सदस्यीय कमेटी स्टेशन मास्टर के पास बैठकर रास्ता खोलने की मांग कर रही थी। किसानों को उम्मीद थी कि जल्द ही रास्ता खोल दिया जाएगा, लेकिन दोपहर 2 बजे तक कोई समाधान निकलता नजर नहीं आया। इसके बाद किसानों ने दोपहर 3 बजे रेल रोकने का ऐलान किया और शाम करीब 4 बजे किसान रेल ट्रैक पर जमा होने शुरू हो गए। इसके बाद किसानों ने दिल्ली से श्रीगंगानगर जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस को जाखल स्टेशन पर करीब आधे घंटे तक रोके रखा, जबकि हिसार से लुधियाना जाने वाली पैसेंजर ट्रेन करीब 45 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। दोनों ट्रेनों के रुकने की सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन भी हरकत में आया। मौके पर टोहाना के डीएसपी जयभगवान पहुंचे। निर्धारित समय से देरी से निकलीं ट्रेनें उन्होंने किसानों से बातचीत की और काफी मशक्कत के बाद उन्हें समझाया। डीएसपी ने किसानों से अपील की कि वे फिलहाल दोनों ट्रेनों को जाने दें और अधिकारियों से बातचीत कर रास्ते की समस्या का जल्द समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा। डीएसपी के आश्वासन के बाद किसानों ने दोनों ट्रेनों को रवाना होने दिया। हालांकि, दोनों ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से निकलीं। फिलहाल किसानों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और किसान रेल ट्रैक पर बैठे हुए हैं। अब देखना होगा कि रेलवे और प्रशासन किसानों की रास्ता खोलने की मांग पर क्या कदम उठाते हैं।