Wednesday, 28 October 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · हरियाणा

10,757 गेस्ट टीचर्स को सरकार से झटका:विभाग का नियमित करने से इनकार, प्रधान बोले- फिर जाएंगे कोर्ट, शुरू करेंगे न्याय यात्रा

INT News28 October 2026 at 02:48 pm

हरियाणा में नियमितीकरण की उम्मीद लगाए बैठे 10,757 गेस्ट टीचर्स को प्रदेश सरकार ने झटका दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने उन्हें नियमित करने से इनकार कर दिया है। विभाग ने अपने स्पीकिंग ऑर्डर में कहा कि गेस्ट टीचर्स की नियुक्तियां नियमित भर्ती के नियमों के अनुसार नहीं हुई थीं। इनमें आरक्षण और चयन प्रक्रिया से जुड़ी शर्तों का पालन नहीं किया गया। इसलिए उन्हें नियमितीकरण नीति का लाभ नहीं दिया जा सकता। दूसरी ओर, गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है।आरोप लगाया कि विभाग ने 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत जांच करने के बजाय नियुक्ति प्रक्रिया को आधार बनाकर दावे खारिज किए। फिर कोर्ट जाएंगे टीचर्स- धारशूल गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रधान कृष्ण धारशूल ने कहा कि वे करीब 21 साल से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। अब इस फैसले के खिलाफ दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। गेस्ट टीचर्स ने नियमितीकरण की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत उनके दावों पर फैसला लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने इस फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी। विभाग ने नियमितीकरण करने से मना किया कहा कि खंडपीठ ने भी प्रत्येक अध्यापक के मामले की नीति के अनुसार जांच कर फैसला लेने को कहा था। लेकिन शिक्षा विभाग ने नियमितीकरण का लाभ देने से इनकार कर दिया। 2014 की नियमितीकरण नीति में इन आधारों पर नियुक्ति प्रक्रिया की जांच करने की शर्त नहीं थी। नीति के तहत यह देखना था कि कर्मचारी ने तय तारीख तक तीन साल की सेवा पूरी की है या नहीं, वह स्वीकृत पद पर काम कर रहा था या नहीं और उसके पास जरूरी योग्यता है या नहीं। आरोप लगाया कि इन शर्तों पर प्रत्येक अध्यापक के दावे की जांच करने के बजाय नियुक्ति प्रक्रिया में कमियां निकालकर नियमितीकरण से इनकार कर दिया। अब दोबारा शुरू होगी कानूनी लड़ाई स्टेट कैशियर गुरुदत्त शास्त्री ने कहा कि सरकार के फैसले का कानूनी तरीके से विरोध किया जाएगा। संगठन जल्द ही दोबारा अदालत का रुख करेगा। गेस्ट टीचर्स लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनके नियमितीकरण के दावों पर नीति की शर्तों के अनुसार फैसला होना चाहिए। जल्द ही फिर से न्याय यात्रा भी शुरू करेंगे।