समाचार · छत्तीसगढ़
राष्ट्रपति ने सारंगढ़ की शिक्षिका सुनीता यादव को किया सम्मानित:नवाचार और तकनीक से प्राथमिक शिक्षा को दी नई दिशा, छत्तीसगढ़ से एकमात्र शिक्षिका
शिक्षक दिवस के मौके पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लिए गौरव का पल रहा। बरमकेला ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सुनीता यादव छत्तीसगढ़ से इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाली अकेली शिक्षिका हैं। सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुनीता यादव को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चयनित शिक्षकों के कार्यों पर आधारित लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गईं। सुनीता यादव को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान, नवाचार और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों के लिए यह सम्मान मिला है। साहित्य, तकनीक और क्रिएटिविटी को बनाया पढ़ाई का हिस्सा सुनीता यादव ने ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल में बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने साहित्य, तकनीक, रचनात्मकता और अनुभव आधारित गतिविधियों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया। पढ़ाई में पीछे रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने खेल-खेल में पढ़ाने समेत कई नए तरीकों का इस्तेमाल किया। लघु फिल्मों से कठिन विषयों को समझाना कठिन विषयों को आसान तरीके से समझाने के लिए सुनीता यादव खुद बच्चों के साथ मिलकर लघु फिल्में तैयार करती हैं। इन फिल्मों का उपयोग वह कक्षा में पढ़ाने के लिए करती हैं। इसके अलावा दीक्षा ऐप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसे तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर बच्चों की पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बनाने का प्रयास करती हैं। उनके प्रयासों में शिक्षा के साथ रोजगार संबंधी जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ना भी शामिल है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य का भी रखती हैं ध्यान सुनीता यादव की संवेदनशीलता कक्षा तक सीमित नहीं है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए वह अपने खर्च पर उन्हें रोज दूध देती हैं। साथ ही समाज के लोगों को भी बच्चों को अधिक से अधिक न्योता भोजन कराने के लिए प्रेरित करती हैं। आदिवासी बच्चों के लिए चलाया निशुल्क समर कैंप शिक्षा से वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप चलाया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को अध्यापन कराया और उन्हें पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर किया शोध राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव और उसके प्रभावों पर सुनीता यादव ने शोध पत्र तैयार किया है। वह जिले की पहली महिला शिक्षिका हैं, जिन्होंने इस विषय पर शोध पत्र तैयार किया है। पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ीं शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों में भी सुनीता यादव सक्रिय रही हैं। प्रकृति संरक्षण के लिए सीड बॉल तैयार करने और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी बनाने जैसे कार्यों के जरिए उन्होंने विद्यार्थियों में सामाजिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया। पहले भी मिल चुका है राज्य और साहित्यिक सम्मान शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए सुनीता यादव को पहले भी सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्हें राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया था। वहीं, वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में उन्हें पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से नवाजा गया। अब राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान उनके निरंतर प्रयासों और प्राथमिक शिक्षा में किए गए नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिला संवाद का अवसर राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित शिक्षकों को अपने आवास पर आमंत्रित कर बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस दौरान शिक्षिका सुनीता यादव ने प्रधानमंत्री को अपने शिक्षण कार्य, नवाचारों और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके नियमित अध्यापन के साथ शिक्षा में नवाचार, तकनीक और रचनात्मक माध्यमों के उपयोग की सराहना की। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे से विद्यालय में लघु फिल्मों, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और स्मार्ट क्लास के जरिए शिक्षण के उनके प्रयासों ने विद्यालय को नवाचार आधारित शिक्षा का उदाहरण बनाया है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव का क्षण सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने पर जिले के प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि जिले की शिक्षिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव की बात है। उनके नवाचारपूर्ण कार्य दूसरे शिक्षकों को भी नई सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे। प्रभारी मंत्री ने कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने का प्रयास सराहनीय है। यह उपलब्धि सुनीता यादव के साथ पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। शिक्षक परिवार में हुआ जन्म, पढ़ाई के बाद चुना शिक्षण सुनीता यादव का जन्म महासमुंद जिले के सांकरा में शिक्षक परिवार में हुआ। छात्र जीवन से ही वह मेधावी रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा में हुई। इसके बाद उन्होंने कला महाविद्यालय पिथौरा से स्नातक और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर से बीएड करने के बाद उन्होंने शिक्षण को अपना कर्मक्षेत्र चुना। बरमकेला के व्यवसायी नंदकुमार यादव से विवाह के बाद भी उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सक्रियता और रचनात्मकता को जारी रखा। उनकी पुत्री सृजना यादव गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार की छात्रा हैं। छोटे स्कूल से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची पहचान राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान सुनीता यादव की उस निरंतर यात्रा की राष्ट्रीय पहचान है, जिसमें उन्होंने एक छोटे से ग्रामीण विद्यालय की कक्षा को नवाचार, साहित्य, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़कर बच्चों के लिए सीखने का जीवंत मंच बनाया।