Sunday, 6 September 2026
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प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन: नए TGT-PGT भर्ती के नियमों के खिलाफ आर-पार की जंग

INT News6 September 2026 at 11:46 am

Prayagraj TGT-PGT Protest: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्थित प्रसिद्ध पत्थर गिरजाघर के पास टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन अब अत्यंत उग्र रूप धारण कर चुका है. नए परीक्षा पैटर्न और गजट नियमों से असंतुष्ट प्रतियोगी छात्रों ने युवा मंच के तत्वावधान में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है. अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि विवादित 16 सितंबर के नए नियमों को तुरंत निरस्त कर 104 साल पुरानी पारदर्शी व्यवस्था के तहत ही वर्ष 2026 का नया विज्ञापन जारी किया जाए.

नए नियमों से प्रभावित लाखों युवाओं की समस्याएं और बीएड अनिवार्यता

युवा मंच के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि अचानक लागू की गई नई चयन शर्तों से प्रदेश भर के लगभग 7 लाख युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है. प्रवक्ता पद हेतु बिना बीएड योग्यता वाले अभ्यर्थियों को बाहर करने से संगीत, कला, कंप्यूटर तथा एकल विषय के छात्र सीधे प्रतिस्पर्धा से वंचित हो चुके हैं. इसके अतिरिक्त भर्ती आयोग द्वारा अचानक सामान्य अध्ययन, टीईटी तथा माइनस मार्किंग लागू करने के फैसले से प्रतियोगी छात्र अत्यधिक आक्रोशित हैं.

परीक्षा प्रक्रिया में अनिश्चितता और अभ्यर्थियों के गंभीर आरोप

आंदोलनकारी छात्राओं ने भर्ती आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े करते हुए कहा कि पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं नियमित आयोजित होती हैं, परंतु शिक्षक भर्तियां वर्षों तक लंबित रखी जाती हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2022 की पुरानी भर्ती प्रक्रिया को खींचकर 2026 तक लाया गया और अब मुख्य परीक्षा से ठीक तीन महीने पूर्व अचानक पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव कर दिया गया. इतने कम समय में नया पाठ्यक्रम पूरा करना किसी भी छात्र के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.

उच्च शिक्षण योग्यता का सवाल और अनशन जारी रखने का संकल्प

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का तर्क है कि जो अभ्यर्थी नेट और जेआरएफ जैसी राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षाएं पास कर डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसर बनने की क्षमता रखते हैं, उन्हें 12वीं कक्षा में पढ़ाने हेतु अयोग्य ठहराना पूरी तरह से अनुचित है. अधिवक्ताओं और छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि प्रशासनिक वार्ताओं के बावजूद बिना किसी लिखित आश्वासन के यह अनशन समाप्त नहीं होगा. यदि शासन द्वारा पुरानी नियमावली बहाल नहीं की गई तो प्रतियोगी छात्र अपने अधिकारों के लिए इस जनांदोलन को और अधिक तेज करेंगे.

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