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INS ब्रह्मपुत्र पलटने का मामला: नौसेना का एक्शन, दो अधिकारियों पर कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू

भारतीय नौसेना ने युद्धपोत INS ब्रह्मपुत्र के मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान आंशिक रूप से पलटने के मामले में दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू कर दी है. अधिकारियों पर ड्यूटी में कथित लापरवाही और जहाज को खतरे में डालने के आरोप हैं. यह हादसा जुलाई 2024 में जहाज में आग लगने के बाद हुआ था.
कमांडिंग ऑफिसर और लेफ्टिनेंट कमांडर पर आरोप
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट मार्शल का सामना करने वाले अधिकारियों में जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और उस समय के ऑफिसर ऑफ द डे शामिल हैं. कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन रैंक के अधिकारी हैं, जबकि दूसरे अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर हैं. मुंबई में सैन्य अदालत की कार्यवाही 12 अक्टूबर को शुरू हुई थी.
कैप्टन पर जहाज को खतरे में डालने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, कमांडिंग ऑफिसर पर भारतीय नौसेना के जहाज को खतरे में डालने और अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं. दूसरे अधिकारी पर भी लापरवाही का आरोप है. नौसेना में 'हैजार्डिंग' का मतलब किसी जहाज को खतरे में डालना होता है. कोर्ट मार्शल में दोषी पाए जाने पर फटकार, वरिष्ठता में कटौती से लेकर अधिकतम दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है.
आग बुझाने के दौरान पलट गया था युद्धपोत
3,850 टन वजनी INS ब्रह्मपुत्र जुलाई 2024 में मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान आग लगने के बाद एक तरफ झुककर पलट गया था. आग बुझाने के लिए जहाज में बड़ी मात्रा में पानी डाला गया था. इसी दौरान जहाज का संतुलन बिगड़ गया और वह एक ओर झुक गया. इस घटना ने नौसेना के जहाजों की मरम्मत के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े किए थे.
हादसे में एक नौसैनिक की हुई थी मौत
इस हादसे में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की मौत हो गई थी. वह मरम्मत कार्य में शामिल क्रू सदस्यों में से एक थे. जहाज पर मौजूद ज्यादातर कर्मचारी गैंगवे के रास्ते बाहर निकल गए थे, जबकि कुछ लोगों ने पानी में छलांग लगाकर अपनी जान बचाई. सितेंद्र सिंह पानी में डूब गए थे.
मरम्मत के बाद परीक्षण से गुजर रहा है INS ब्रह्मपुत्र
एक अधिकारी के मुताबिक, INS ब्रह्मपुत्र की मरम्मत पूरी हो चुकी है और फिलहाल उसका परीक्षण चल रहा है. उम्मीद है कि अगले साल तक यह दोबारा समुद्र में संचालन के लिए तैयार हो सकता है. जहाज को फिर से सीधा करने और मरम्मत में कई महीने लगे थे. नुकसान की गंभीरता के कारण शुरुआत में इसकी सेवा में वापसी को लेकर आशंका जताई गई थी.
हादसे के बाद नौसेना ने लागू किए सुरक्षा उपाय
घटना के बाद तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने एक रियर एडमिरल की अध्यक्षता में विशेष कार्यबल (STF) बनाया था. इसका उद्देश्य नौसेना के जहाजों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों की समीक्षा करना और दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाना था. कार्यबल की सिफारिशें सभी नौसैनिक कमांड, प्रतिष्ठानों और इकाइयों को भेजी गईं और उन्हें लागू किया गया.
INS बेतवा हादसे में भी हुआ था कोर्ट मार्शल
दिसंबर 2016 में INS बेतवा भी मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौरान डॉक ब्लॉक से फिसलकर पलट गया था. उस हादसे में दो नौसैनिकों की मौत हुई थी और 14 घायल हुए थे. बाद में तीन अधिकारियों का कोर्ट मार्शल हुआ था. उन्हें चार से छह महीने तक वरिष्ठता में कटौती की सजा दी गई थी. INS ब्रह्मपुत्र मामले में अब सैन्य अदालत की कार्यवाही के नतीजे का इंतजार है.