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Explainer: चक्रवात मुरासु का नाम किस देश ने दिया? कैसे तय होते हैं तूफानों के नाम, जानिए पूरी प्रक्रिया

INT News1 November 2026 at 03:46 pm

Cyclone Murasu: IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात ‘मुरासु’ 2 नवंबर की सुबह तक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है. इसके बाद इसके उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है. तूफान के 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट पार करने का अनुमान है. इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि तेज झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की आशंका है.

किस देश ने दिया चक्रवात मुरासु का नाम?

चक्रवात ‘मुरासु’ का नाम भारत ने प्रस्तावित किया है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों के नाम रखने के लिए उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के 13 देशों ने मिलकर नामों की सूची तैयार की है. इन देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, मालदीव, ओमान, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं.

इस व्यवस्था के तहत सभी सदस्य देश पहले से कुछ नाम प्रस्तावित करते हैं. इन नामों को एक निर्धारित क्रम में सूचीबद्ध किया जाता है. जब इस क्षेत्र में कोई चक्रवात बनता है और नाम देने की स्थिति आती है, तो सूची में अगला नाम इस्तेमाल किया जाता है.

इसका मतलब है कि किसी तूफान का नाम जिस देश ने दिया है, जरूरी नहीं कि वह उसी देश की ओर बढ़े या वहां सबसे ज्यादा तबाही मचाए. नाम देने और तूफान की दिशा के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता.

क्या है ‘मुरासु’ नाम का मतलब?

चक्रवात ‘मुरासु’ का नाम तमिल भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘ढोल’ होता है. मुरासु तमिल संस्कृति का एक प्राचीन ताल वाद्य यंत्र है. पुराने समय में इसका इस्तेमाल मुनादी (डुग्गी) और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति आगाह करने के लिए किया जाता था. ढोल बजाकर लोगों को खतरे और आने वाली मुसीबतों के बारे में सचेत किया जाता था. इसी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए भारत ने इस नाम का सुझाव दिया था.

चक्रवातों के नाम कैसे तय किए जाते हैं?

चक्रवातों के नाम रखने की प्रक्रिया पहले से निर्धारित है. इसके लिए सदस्य देशों को नामों की सूची देनी होती है. पूरी प्रक्रिया को चार चरणों में समझा जा सकता है.

सदस्य देश प्रस्तावित करते हैं नाम: उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के 13 सदस्य देश चक्रवातों के लिए नामों का एक समूह प्रस्तावित करते हैं. इन सभी नामों को एक साझा सूची में शामिल किया जाता है.

नामों की जांच की जाती है: प्रस्तावित नामों को तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक होना चाहिए. नाम छोटे, सरल और आसानी से बोले जाने वाले होने चाहिए. ऐसे नामों से बचा जाता है जो किसी समुदाय, देश या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं या विवाद पैदा कर सकते हैं.

तय क्रम से मिलता है नाम: सभी नामों को एक निश्चित क्रम में रखा जाता है. जब किसी नए चक्रवात को नाम देने की जरूरत पड़ती है, तो सूची में अगला उपलब्ध नाम इस्तेमाल किया जाता है. इसमें यह नहीं देखा जाता कि तूफान किस देश की ओर बढ़ रहा है.

पहचान और चेतावनी देना होता है आसान: चक्रवातों के नाम रखने का सबसे बड़ा मकसद उनकी पहचान को आसान बनाना है. इससे मौसम विभाग, प्रशासन, मीडिया और आम लोगों के बीच तूफान से जुड़ी जानकारी साझा करने में आसानी होती है. एक साथ कई चक्रवाती प्रणालियां सक्रिय होने पर भी भ्रम की स्थिति कम होती है.

चक्रवात को नाम कब दिया जाता है?

हर कम दबाव वाले क्षेत्र को चक्रवात नहीं कहा जाता और न ही हर मौसमी हलचल को कोई नाम दिया जाता है. उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में किसी मौसमी प्रणाली को नाम तब मिलता है, जब वह निर्धारित मानकों के अनुसार चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंच जाती है.

इसके लिए हवा की अधिकतम निरंतर गति कम से कम 34 समुद्री मील यानी करीब 62 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए. इस स्तर पर पहुंचने के बाद क्षेत्रीय चक्रवात नामकरण सूची के अनुसार उसे नाम दिया जाता है.

इसके बाद तूफान की रफ्तार और तीव्रता बढ़ने पर उसे अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है. इनमें गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm), अति गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) और अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान (Extremely Severe Cyclonic Storm) जैसी श्रेणियां शामिल हैं.

यानी चक्रवात का नाम उसकी ताकत, उसके संभावित लैंडफॉल या उससे होने वाले नुकसान के आधार पर नहीं, बल्कि पहले से तैयार सूची के क्रम के अनुसार तय होता है.

चक्रवातों के नाम कौन तय करता है?

चक्रवातों के नामकरण की जिम्मेदारी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पास है. नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) चक्रवातों की निगरानी करता है और निर्धारित सूची के अनुसार उन्हें नाम देता है.

यह व्यवस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र के एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के क्षेत्रीय पैनल के तहत संचालित होती है. इसका मकसद चक्रवातों की पहचान आसान बनाना और आपदा संबंधी चेतावनियों को स्पष्ट तरीके से लोगों तक पहुंचाना है.

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