समाचार · मध्य प्रदेश
छतरपुर में बंदर ने महिला पर किया हमला:महिला के सिर और जबड़े में आई चोट, चेहरे पर नाखून के निशान
छतरपुर में पुराने इलाहाबाद बैंक के पीछे से गल्ला मंडी और बघराजन माता मंदिर तक बंदरों के हमलों से लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अब तक 40 से 50 लोग घायल हो चुके हैं। लाल मुंह के बंदरों के हमलों के डर से लोग घरों से निकलने में भी घबरा रहे हैं। ताजा घटना 31 अक्टूबर की शाम की है। वार्ड नंबर 7 के संजय गांधी मार्ग निवासी वीरेंद्र सेन 'पगड़ी वाले' की 38 वर्षीय पत्नी अनीता सेन पर बंदर ने हमला कर दिया। हमले में उनके सिर, दांतों और जबड़े के पास चोट आई। उन्हें अस्पताल ले जाकर इलाज कराया गया। वन विभाग ने नगर पालिका की जिम्मेदारी बताई रहवासियों का कहना है कि लगातार हमलों के बावजूद बंदर को पकड़ा नहीं गया है। लोगों ने वन विभाग से संपर्क किया तो अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि काले मुंह के बंदरों को पकड़ा जा सकता है, लेकिन लाल मुंह के बंदरों को पकड़ने का नियम नहीं है। छतरपुर रेंज के वन विभाग के रेंजर अंबुज नयन पांडे ने बताया कि लाल मुंह के बंदरों को वन विभाग नहीं पकड़ता। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हें पकड़ने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की है। शहर में बंदर को पकड़ने का काम नगर पालिका या नगर परिषद को करना होगा। उन्होंने बताया कि लाल मुंह के बंदर वन्यजीव श्रेणी में नहीं आते। इस संबंध में ऊपर से आदेश और सर्कुलर जारी हुआ है। नगर पालिका में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं रहवासियों का कहना है कि उन्होंने नगर पालिका में भी शिकायत की, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। वन विभाग इसे नगर पालिका की जिम्मेदारी बता रहा है, जबकि नगर पालिका की ओर से समस्या का समाधान नहीं किया गया है। इससे लोगों में नाराजगी है। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक, बंदरों के हमलों में कई लोग घायल हो चुके हैं और उन्हें इलाज कराना पड़ा है। बच्चों और महिलाओं को घर से बाहर निकलने में सबसे ज्यादा डर लग रहा है। लोगों का कहना है कि बंदर का रंग काला हो या लाल, हमले में घायल आम नागरिक ही हो रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप कर बंदर को पकड़वाने और लोगों को राहत दिलाने की मांग की है।