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इंदौर की 50 रास्ते बंद, 6 घंटे लगा महाजाम:BJP की पदयात्रा से हजारों लोग परेशान; मजदूर बोला- शाम को परिवार क्या खाएगा
इंदौर में शुक्रवार सुबह 8 बजे से सड़कों पर निकले लोग रास्ते तलाशते रहे, लेकिन हर तरफ बैरिकेडिंग और जाम मिला। भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा सुभाष नगर से पाटनीपुरा चौराहे तक निकली। इसके लिए करीब 50 गलियों के रास्ते बंद कर दिए गए। भमोरी की ओर से पाटनीपुरा आने वाले मार्ग पर भी चार पहिया वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। करीब 6 घंटे तक शहर के कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा। इसका असर उन लोगों पर पड़ा, जिनका इस राजनीतिक कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं था। कोई ऑफिस पहुंचने के लिए परेशान था, तो किसी को मजदूरी पर जाना था। स्कूली बच्चे रास्तों में फंसे रहे। एक यात्री की महाकाल एक्सप्रेस छूट गई। तेज बुखार से तपते बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए पिता पुलिसकर्मियों से रास्ता देने की गुहार लगाता रहा। सड़कों पर फंसे लोगों की परेशानी सिर्फ जाम तक सीमित नहीं थी। उनका सवाल था कि इतने बड़े कार्यक्रम के लिए ट्रैफिक व्यवस्था बनाते समय आम लोगों की जरूरतों का ध्यान क्यों नहीं रखा गया? घर से निकले तो रास्ते बंद मिले सुबह करीब 8 बजे से ही सुभाष नगर से पाटनीपुरा के बीच की लगभग 50 गलियों में बैरिकेडिंग कर दी गई थी। मुख्य मार्गों के साथ आसपास की कॉलोनियों के रास्ते भी बंद थे। भमोरी की तरफ से पाटनीपुरा आने वाले मार्ग पर चार पहिया वाहनों को रोक दिया गया। लोग घरों से ऑफिस, दुकान, स्कूल और काम पर जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में बैरिकेडिंग मिलने के बाद फंस गए। किसी को यह स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि कौन-सा रास्ता कब तक बंद रहेगा। कई जगह वाहन चालकों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस होती रही। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पांच हजार से अधिक लोगों को इस अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। मजदूरी करने वाले कई लोगों की दिनभर की कमाई प्रभावित हुई, जबकि नौकरीपेशा लोगों को ऑफिस पहुंचने में देरी हुई। मजदूर की चिंता- शाम को परिवार क्या खाएगा? जूनी इंदौर निवासी मजदूर राकेश जाट की परेशानी जाम से आगे परिवार के भरण-पोषण तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि वह रोज मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। दिनभर काम करने के बाद ही शाम को घर में खाना बनता है। राकेश ने कहा, 'मैं मजदूर आदमी हूं। दिनभर काम करता हूं, तब शाम को घर में खाना बनता है। अगर दिनभर काम नहीं करूंगा, तो शाम को परिवार का पेट कैसे पालूंगा?' उन्होंने कहा कि चाहे मुख्यमंत्री हों या प्रधानमंत्री, उनके कार्यक्रम के लिए बीच बाजार में इस तरह रास्ते रोकने के बजाय दूसरी व्यवस्था की जानी चाहिए। बैरियर लगाने या मंच बनाने के लिए ऐसी जगह चुनी जानी चाहिए, जहां आम लोगों के कामकाज पर असर न पड़े। राकेश के मुताबिक, वे सुबह 9:30 बजे से परेशान हो रहे थे और 11:30 बजे तक भी उन्हें राहत नहीं मिली थी। उन्होंने कहा, 'मुझे किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। चाहे कोई भी पार्टी हो, जनता को इस तरह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।' उन्होंने जनप्रतिनिधियों से मजदूरी करके परिवार चलाने वाले लोगों की परेशानी समझने की अपील की। स्टेशन पहुंचने में लगे दो घंटे, छूटी ट्रेन वाहन चालक राज शुक्ला सुबह 8 बजे घर से रेलवे स्टेशन जाने के लिए निकले थे। उन्हें लगा था कि सामान्य रास्ते से स्टेशन पहुंच जाएंगे, लेकिन जाम के कारण करीब दो घंटे लग गए। राज ने बताया कि यातायात पुलिस की ओर से ऐसी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी, जिससे पता चल सके कि कौन-से रास्ते बंद हैं और किन वैकल्पिक मार्गों से जाना है। इसी दौरान उनके सामने एक यात्री की महाकाल एक्सप्रेस छूट गई। यात्री को ट्रेन से वाराणसी जाना था, लेकिन जाम में फंसने के कारण वह समय पर स्टेशन नहीं पहुंच पाया। बच्चे को तेज बुखार, पिता लगाता रहा गुहार जाम के बीच भागीरथपुरा निवासी पवन अपने तेज बुखार से पीड़ित बच्चे को अस्पताल लेकर जा रहे थे। रास्ते में बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोक दिया गया। पवन ने बताया कि वह करीब एक घंटे से परेशान हो रहे थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों से बच्चे की तबीयत का हवाला देते हुए अस्पताल जाने देने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया। पवन का आरोप है कि जब उन्होंने बच्चे की तबीयत बताकर रास्ता देने की बात कही तो एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर कहा, 'बच्चा पैदा ही क्यों किया।' नेताओं के वाहनों के लिए रास्ता, जनता जाम में पदयात्रा में शामिल होने के लिए जनप्रतिनिधि और भाजपा कार्यकर्ता अपने वाहनों से पहुंचे। कई वाहन हूटर बजाते हुए कार्यक्रम स्थल की ओर गए। मुख्य मार्गों पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के वाहन खड़े रहे, लेकिन उन्हें हटाने के लिए पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर आम वाहन चालक रास्ता तलाशते रहे। लोगों ने सवाल उठाया कि जब आम जनता के वाहनों को रास्ते से हटाया जा रहा था तो कार्यक्रम में शामिल होने आए नेताओं और कार्यकर्ताओं के वाहनों के लिए अलग व्यवस्था क्यों नहीं की गई? एडवाइजरी थी, लेकिन समय का जिक्र नहीं यातायात पुलिस ने पदयात्रा के लिए रूट डायवर्जन की एडवाइजरी जारी की थी, लेकिन लोगों की शिकायत थी कि इसमें रास्ते बंद रहने का स्पष्ट समय नहीं बताया गया था। उनका कहना था कि अगर पहले से पता होता कि कौन-सा रास्ता कितनी देर बंद रहेगा तो वे दूसरे मार्ग से निकल सकते थे। एक अन्य वाहन चालक नाश्ता करने के लिए घर से निकले थे। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि भाजपा ने कौन-सा कार्यक्रम आयोजित किया है। अलग-अलग क्षेत्रों से जनप्रतिनिधि, विधायक और अन्य नेता कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं, लेकिन इतने बड़े आयोजन की जानकारी आम जनता को पहले से देना जरूरी है।