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‘ग्रीन सिटी’ की हवा हुई खराब! जमशेदपुर का AQI 197 पहुंचा..पढ़े पूरी रिपोर्ट

जमशेदपुर: शहर में हवा की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी इंडेक्स एक्यूआइ) में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. मंगलवार शाम से बुधवार शाम के बीच जारी आंकड़ों के अनुसार, सुबह के समय शहरवासियों को सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा का सामना करना पड़ा, जबकि रात में एयर क्वालिटी में काफी सुधार दर्ज किया गया. आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह 8:01 बजे जमशेदपुर का एक्यूआइ बढ़कर 197 के स्तर पर पहुंच गया, जो 'मध्यम से खराब' श्रेणी में आता है.
सुबह के व्यस्त समय में सड़कों पर वाहनों की आवाजाही और धूल-कणों के कारण एक्यूआइ में यह उछाल दर्ज किया गया. सुबह 9:31 बजे एक्यूआइ 180 के करीब रहा, जो बुजुर्गों और बच्चों के लिए चिंताजनक स्थिति है.
रात तक कम हो रहा है लेवल
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार देर रात 2:31 बजे शहर में न्यूनतम एक्यूआइ 45 दर्ज किया गया, जिसे 'अच्छा' माना जाता है. देर रात और अहले सुबह शहर में प्रदूषण का स्तर काफी कम रहा और लोग साफ हवा में सांस ले सके. सुबह 10 बजे के बाद शहर की एयर क्वालिटी में धीरे-धीरे सुधार देखा गया. दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे के बीच एक्यूआइ का स्तर 70 से 100 की रेंज में (संतोषजनक श्रेणी) बना रहा. हालांकि, दोपहर 3:00 बजे के आसपास एक्यूआइ लगभग 140 दर्ज किया गया. सुबह के समय एक्यूआइ का स्तर अधिक होने के कारण चिकित्सकों ने मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सावधानी बरतने और मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
2026 में 6 दिन हवा की क्वालिटी रही काफी खतरनाक
अमूमन माना जाता है कि बारिश के मौसम में एक्यूआइ बेहतर और ठंड के मौसम में ज्यादा खराब होता है. लेकिन, बारिश के मौसम में भी एक्यूआइ का यह लेवल आना खतरे की घंटी है. आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के कुल 237 दिनों में 6 दिन काफी खतरनाक हवा की क्वालिटी थी, जबकि 32 दिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वातावरण था. 114 दिन में हवा की क्वालिटी औसत और 43 दिन काफी खराब क्वालिटी थी.
जहरीली हवा से बचने के उपाय जरूरी: डॉ निर्मल
चिकित्सक डॉ निर्मल कुमार ने बताया कि जहरीली हवा से बचने के लिए उपाय करने जरूरी है. प्रदूषित हवा से धमनियों में सूजन आती है. इससे हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए लंबे समय तक जहरीली हवा में रहने से उनके फेफड़ों की क्षमता स्थायी रूप से घट सकती है. अति-प्रदूषित दिनों में बाहर जाने से बचें, एन-95 मास्क पहने, घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और सुबह व शाम के वक्त भारी वर्कआउट नहीं करें.
कड़े कानून लागू करने की जरूरत : आरके सिंह
पर्यावरणविद आरके सिंह ने बताया कि पानी का छिड़काव या बारिश सिर्फ तात्कालिक समाधान है, जो मूल समस्या को हल नहीं करते. वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक धुएं और धूल प्रबंधन जैसे प्रमुख कारणों पर कड़े कानून लागू करने की आवश्यकता है. सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है. वायु प्रदूषण क्षेत्रीय सीमाओं को नहीं मानता, इसलिए राज्यों और केंद्र सरकार को मिलकर दीर्घकालिक नीतियां बनाने की जरूरत है.