Wednesday, 28 October 2026
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अखिलेश यादव को भगवान सद्बुद्धि दें; बाबा रामदेव का भारत में तख्तापलट का सपना देखने को भी जवाब

INT News28 October 2026 at 01:39 pm

योग गुरु स्वामी रामदेव ने देश में चल रहे आंदोलनों और राजनीतिक बयानों को लेकर कहा कि भारत में बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल या मध्य पूर्व के देशों की तरह तख्ता पलट नहीं होने वाला है। देश में लोकतंत्र, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस और न्यायालय जैसी मजबूत व्यवस्थाएं हैं। जिन्हें सत्ता में आना है, वे लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता हासिल कर सकते हैं। सड़कों पर उतरकर सत्ता परिवर्तन नहीं किया जा सकता। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयानों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि आजकल के नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें या उनकी सद्गति दें।बुधवार को कनखल स्थित पतंजलि योगपीठ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत में तख्ता पलट और बगावत की कोई गुंजाइश नहीं है। कुछ लोगों के मन में इस तरह के ख्वाब हो सकते हैं, लेकिन देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि बदलाव का रास्ता संविधान और चुनाव से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि देश में लाखों की संख्या में सैनिक और अर्धसैनिक बल हैं। पुलिस और न्यायपालिका भी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। ऐसे में किसी भी तरह के असंवैधानिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की कल्पना करना उचित नहीं है।सनातन की सही जानकारी समाज तक पहुंचेयोगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को लेकर समाज में सही जानकारी पहुंचाने की जरूरत है। सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति है। वेदों में भेदभाव नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण का संदेश है। भारतीय ज्ञान परंपरा को समझे बिना उस पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी ऋषि परंपरा, वेदों, उपनिषदों, योग, आयुर्वेद और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। प्रत्येक भारतीय को अपनी गौरवशाली विरासत पर गर्व करना चाहिए।देवी-देवताओं को बदनाम करने के लिए कई बातें की जा रहींउन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म और देवी-देवताओं को बदनाम करने के लिए तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं। भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 52वें सम्मेलन में ऐसे मामलों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार और शराब का सेवन करने वाला बताने, भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य महारास को अपभ्रंश एवं दोषपूर्ण रूप में प्रस्तुत करने और महायोगी शिव को नशे से जोड़कर दिखाने जैसी बातों पर सम्मेलन में विचार किया जाएगा। रामदेव ने कहा कि भारतीय परंपराओं के बारे में किसी भी तरह की टिप्पणी तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। सनातन के मूल स्वरूप को विकृत करके प्रस्तुत करने के प्रयासों का जवाब दिया जाएगा।30 अक्तूबर से प्राच्य विद्या परिषद का 52वां सम्मेलनस्वामी रामदेव ने बताया कि 30 अक्तूबर से पतंजलि योगपीठ में भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का 52वां सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि और विद्वान शामिल होंगे। सम्मेलन में सनातन धर्म, वैदिक परंपराओं और भारतीय ज्ञान-विज्ञान से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सनातन देवी-देवताओं के कथित अपमान और भारतीय परंपराओं को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम से जुड़े विषयों पर प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा, ताकि इन मुद्दों पर परिषद का दृष्टिकोण सामने आ सके। रामदेव ने कहा कि सनातन की मूल भावना समन्वय, सह-अस्तित्व, करुणा और विश्व कल्याण की है। भारतीय ज्ञान परंपरा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। योग, आयुर्वेद और अध्यात्म की प्रासंगिकता आज पूरी दुनिया में स्वीकार की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति का सम्मान करने का अर्थ किसी दूसरे धर्म या परंपरा को छोटा दिखाना नहीं है, बल्कि अपने ज्ञान और जीवन मूल्यों को समझना है। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण भी उपस्थित रहे।सनातन में सभी समान, किसी का अपमान स्वीकार नहींस्वामी रामदेव ने जाति और सामाजिक समानता को लेकर कहा कि सनातन में सभी लोग समान हैं और किसी भी जाति के व्यक्ति का अपमान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दलित का अपमान भी उतना ही अनुचित है, जितना ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य का। सभी जातियों के लोगों को समान सम्मान मिलना चाहिए। समाज में भेदभाव के बजाय समानता और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।