समाचार · मध्य प्रदेश
नेपानगर में आदिवासियों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया:कहा- वन विभाग कुएं खोदने से रोक रहा, कई पात्र परिवारों को वनाधिकार पट्टे नहीं मिले
बुरहानपुर जिले के नेपानगर में शुक्रवार दोपहर बाकड़ी, मांडवा और आसपास के गांवों से आदिवासी समाज के लोग वनाधिकार पट्टों समेत अन्य मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारी पहले नेहरू स्टेडियम मैदान में जुटे। इसके बाद नारेबाजी करते हुए रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। एसडीएम सृजन श्रीवास्तव जन विश्वास शिविर में गए थे, इसलिए वे कार्यालय में नहीं मिले। तहसीलदार गजानन वास्कले ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। हालांकि, आदिवासी समाज के लोग एसडीएम को ही ज्ञापन देने पर अड़े रहे। प्रदर्शन को देखते हुए कार्यालय में पुलिस बल भी तैनात रहा। पात्र परिवारों को पट्टे नहीं मिलने का आरोप आदिवासी एकता संगठन के कार्यकर्ता रतन खरते ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के तहत कई पात्र आदिवासी परिवारों को अब तक पट्टे नहीं मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही जगह पर एक व्यक्ति को वन भूमि का पट्टा मिल गया, जबकि वर्षों से उसी भूमि पर काबिज दूसरा व्यक्ति पट्टे से वंचित है। खरते ने कहा कि वे मौके पर जांच कराने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अधिकारियों से मांडवा और बाकड़ी गांव पहुंचकर स्थिति देखने की मांग की। उनका कहना था कि एसडीएम के आकर जवाब देने तक वे वहीं बैठे रहेंगे, चाहे इसके लिए 10 दिन ही क्यों न लग जाएं। दावे खारिज करने और कुआं खोदने से रोकने का आरोप जागृत आदिवासी दलित संगठन की कार्यकर्ता आशा बाई जाधव ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के तहत कई दावे खारिज कर दिए गए, जबकि उनका सत्यापन नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र लोगों को पट्टे नहीं दिए जा रहे हैं और उन्हें कुआं खोदने से भी रोका जा रहा है। आशा बाई ने कहा कि यदि एसडीएम ने मौके पर आकर ज्ञापन नहीं लिया तो वे वहीं रोटी-पानी बनाकर धरना देंगी। योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की बात कही संगठन के कार्यकर्ता अंतराम अवासे ने कहा कि वनाधिकार के पट्टे नहीं मिलने के कारण आदिवासी परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि जी राम जी योजना का लाभ भी आदिवासी परिवारों को मिलना चाहिए। अवासे के मुताबिक, वन विभाग की ओर से ट्रैक्टर चलाने, बोवनी करने और पंप लगाने से रोका जाता है। कुआं खोदने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इन पाबंदियों के कारण आदिवासी समाज के लोग परेशान हैं। प्रदर्शनकारियों ने वनाधिकार अधिनियम के तहत पात्र परिवारों के दावों की जांच, पट्टे देने और वन भूमि पर खेती समेत अन्य गतिविधियों को लेकर आ रही समस्याओं के समाधान की मांग की।